Posts

Showing posts from August, 2020

रेडियो की ख़ुशबू - राजेश चड्ढा जी

Image
  आज 11 अगस्त 2020 का दिन भी हमेशा याद रहेगा। घर पर बोरियत और डिप्रेशन के कारण सोचा बाहर कहीं जा कर आऊँ..... पहले जैतसर में फ़ेसबुक मित्र Neelam से मिला और इनके क्लीनिक के दर्शन किए। आपने बहुत सम्मान और समय दिया। फिर सूरतगढ़ जा कर राजेश चड्ढ़ा जी से मिलना सुखद पलों में से एक है। आपसे आज दूसरी बार मुख़ातिब हुआ हूँ , लेकिन तफ़सील से आज पहली बार ही। आप ऑल इंडिया रेडियो में सीनियर अनाउन्सर हैं और अपनी उम्र में पंद्रह बीस साल पीछे जाऊँ तो मुझे याद आती है बचपन की वो सुनहरी रातें। जब हर शुक्रवार को सांस्कृतिक प्रोग्राम “मिट्टी दी ख़ुशबू” सूरतगढ़ आकाशवाणी सेंटर से प्रसारित होता था और राजेश सर उसे होस्ट किया करते थे। यद्यपि मैं 90 के दशक की पनीरी हूँ लेकिन शौक़ मेरे 70-80 दशक वाले हैं। इसलिए बचपन से रेडियो सुनना , चिट्ठियाँ आदि लिखने की चाहत मेरी आदत में शुमार रही। मुझे याद है मैं और मेरी बहन मीनू हम दोनों शुक्रवार की शाम को होमवर्क करने के बाद फटाफट खाना खा कर रात को साढ़े नौ बजे से पहले ही रेडियो सेट करके बैठ जाते ...और राजेश सर की मधुर आवाज़ सुना करते। मुझे आज भी याद है कैसे आप सबकी एक ए...

दोस्ती का दिन- You can win the battle, but the War.

अंग्रेज़ी की एक कहावत है  “You can win the battle, but you will lose the war. “  रिश्तों की बात करूँ तो ये पंक्ति सच में चरितार्थ होती है।हम जिस परिवेश में जन्म लेते हैं, पलते हैं, बढ़ते हैं और एक आत्मनिर्भर इंसान बनते हैं, वो परिवेश ना केवल हमारी परवरिश अपितु बाध्यता का भी गवाह रहा होता है। यह एक स्वाभाविक सी प्रक्रिया है।  इसके इतर हमारे मस्तिष्क का एक वो कोना भी होता है जो इन सब बातों के मुख़्तलिफ़ कुछ अस्वाभाविक सिग्नलस/संकेतों को ग्रहण करने की इच्छा जताता प्रतीत होता है। हम चाहे जिस भी पृष्ठभूमि से हों लेकिन मस्तिष्क का यह कोना कुछ नावाक़िफ़ चीज़ों को ग्रहण करने के लिए ख़ाली रहता है। इसीलिए जब हम कुछ नया देखते, पढ़ते, महसूस करते या फिर लिखते हैं तो हमारे अवचेतन मन में उस विचार, उस बात, उस प्रेरणा के लिए आसक्ति सी उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रक्रिया को मैं बौद्धिक विकास का नाम दूँगा, जब आंतरिक और बाह्य विसंगतियों में हम विश्लेषण करना शुरू कर देते हैं। यह भी एक सतत प्रक्रिया है और एक इंसान मरते दम तक इस प्रक्रिया का साक्षी रहता है, मौत अवसान नहीं, इस प्रक्रिया का अवरोध ह...