मेरे बाई जी का जन्मदिन
आज मेरे नाना सरदार गुरबचन सिंह औलख जी का जन्मदिन है। आपका जन्म 18 नवम्बर 1924 को हुआ था। ये तस्वीर लगभग 25 साल पुरानी। मैं अपनी बहन के साथ नाना की गोद में। उन्हें हम बाई जी बोलते थे। बाई जी पंजाबी , हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू लिखने पढ़ने और समझने में माहिर थे।औपचारिक शिक्षा दसवीं तक थे लेकिन दुनियादारी में किसी ग्रेजुएट से ज़्यादा माहिर थे। पूरी रिश्तेदारी में कोई भी बड़ा और मुश्किल निर्णय लेना होता तो लोग बाई जी के पास आते। आपका निवास मंडी डबवाली (हरियाणा) में था, यानि की मेरा ननिहाल। मेरा जन्म भी वहीं का है। सालों तक वहाँ के गुरुद्वारा के प्रधान रहे लेकिन एक ईमानदार प्रधान। मुझे आज भी याद है कि उनका प्रबंधन इतना शानदार और कसा हुआ था कि ढीले और कामचोर लोगों की शामत आई रहती थी। गुरूग्रंथ साहिब समेत कई ग्रंथ और किताबें मुँह ज़ुबानी याद थी इन्हें। इनके पिता सरदार मुंशा सिंह जी की भी गिनती अच्छे और सज्जन लोगों में होती थी। वो उस ज़माने में बर्मा (म्यांमार) से व्यापार करके लौटे थे। बाई जी को डायबिटीज़ था लेकिन मीठा खाने के बहुत शौक़ीन थे। आज भी मुझे याद है जब हम लोग श्रीगंग...