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अंतर्स्वर ,रुक कर सुनना कभी

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  ज़िंदगी जैसे नींद से जागे हों, ख़्वाब जैसे कोई अनंत का भुलावा हो। इच्छाएँ,उम्मीदें खिलौनों सी रोज़ खेलते बुनते हैं हम।रिश्ते, यारियाँ सच झूठ की मिली जुली शिकंजी सी, प्रेम कोई असीम सुख जिसकी तलाश में ताउम्र भटकते हैं। धाम,तीर्थ, मठ जैसे नश्वर शरीर से क़बूले गुनाहों की धरती के टुकड़े। असली रास्ता वो जो दिलबर के घर तक जाए। सबसे सुंदर स्वर अनहद नाद; माँ की लोरी से मृत्यु मौन के बीच का वो निरंतर स्वर जो अनसुना कर हम भटक रहे हैं यहाँ। कभी रुक कर सोचना, यहाँ क्यूँ ,किसके लिए, कब तक हैं और करने क्या आए हैं। Dr Gurpreet Singh  #आत्ममंथन #अंतर्स्वर #ज़िंदगी #अनहदनाद #मौन #आंतरिकस्वर #अकेलापन #चिंतन #सोच #मनन #प्रकृति #शब्द #चीख़तेअक्षर #सपने #ख़्वाब #अनंत #रिश्ते #दिलबर #दर्द