कैटरपिलर/ बम्बई डायरी/ 10-09-2016



चुना भट्टी स्टेशन पर रूकती लोकल उसके ज़ेहन में एक हरकत पैदा कर गयी ....
वैसे उसे बम्बई की लोकल में कुछ दिलचस्प नहीं लगा था सिवाय एक बात के , कि यह एक स्टेशन पर 10-15 सेकंड से ज्यादा नहीं रुकती।........ दिल्ली की मैट्रो जैसा ऐ.सी. भी नहीं है इसमें ......सिर्फ बेदम से पंखे हैं .... हालाँकि दिल्ली की मेट्रो में भी बेतहाशा भीड़ होती है .....लेकिन बम्बई की लोकल जैसी दरवाजों से बाहर लटकने की छूट नहीं होती ..........बम्बई की 'लोकल' मानो यहाँ की व्यस्त ,क्रूर ज़िंदगी की प्रतिनिधि बन आपका स्वागत करती है ........जैसे मरीन ड्राइव इस शहर में कुछ पल का दिया हुआ मीठा सा भुलावा है ...... जहाँ बैठ कर अपने आप से बतियाना उसे अच्छा लगता है ....उसके कहे लफ़्ज़ बार बार समन्दर की लहर ले जा कर दूर छोड़ आती है .....वहाँ ,जहाँ सबकी परेशानियाँ ,सबके लफ़्ज़ सम्भाले पड़े हैं .... अलाहिदा -अलाहिदा बैंक अकाउंट्स की तरह।

लोकल की खिड़की से चुना भट्टी के प्लेटफॉर्म पर उसकी निगाहें एक महीन सी हरकत करती आकृति पर टिक गई ....क्या है ये ???....हल्के हरे से रंग का ......रेंग रहा है ....इतनी व्यस्त सी जगह में .....लोगों की आपाधापी से बेख़बर.....लो गाड़ी भी चल पड़ी ....
उसे याद आया अर र रे  कैटर र पिलर... ह हाँ हाँ ...कैटरपिलर...वही तो है ...अचानक से मकड़ी और राजा वाली कहानी याद हो आई ....वो मकड़ी जिसे बार बार गिरता उठता देख युद्ध पस्त राजा को हिम्मत हो आई थी .....ये छोटा सा कैटरपिलर भी उसके जेहन में अजीब सी हरकत पैदा कर गया ........ कई पैरों पर ज़िंदगी के बोझ को ढोता रेंगता निम्न मध्यमवर्गीय मनुष्य क्या किसी कैटरपिलर से कम है ????....

हर इंसान चिल्लाना चाहता है ....ज़िंदगी हंसना खिलखिलाना चाहती है ..... जेहनोज़िगर पर टूटते रिश्तों की जमी काई क्या किसी कैटरपिलर से कम है ???

लोकल में बीस रूपये के पर्स इत्र बेचते शख़्स पर मुँह फाड़ कर हँसती नज़रें क्या किसी कैटरपिलर से कम है ???

 .......सरकारी दफ्तर में रिश्वत का मोल भाव करती नज़रें क्या किसी कैटरपिलर से कम है ???.....

गणपति महोत्सव में होते फैशन शो में अधनंगे बदन को घूरती अल्हड़ नज़रें क्या किसी कैटरपिलर से कम हैं???.......

ऐसे ढेरों सवाल और सबका एक ही ज़वाब ... चारों ओर सर चढ़ कर रेंगता एक ही नाम ( बस मायने अनेक )...

      "कैटरपिलर".......

©डॉ.गुर'प्रीत सिंह / मुम्बई डायरी/ 10-09-2016.

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