मैंटल आधुनिकीकरण

 




बम्बई में काफ़ी समय व्यतीत करने के बाद अब दिल्ली या उत्तरी भारत की व्यवस्था पर हैरानी भी होती है और खीज भी आती है। बम्बई में बहुत सी चीजें इतनी सहजता  और सुगमता से उपलब्ध हैं कि उनके होने पर कभी शुकराना या gratitude महसूस करने की ज़हमत नहीं उठाई। दिल्ली सिर्फ़ शहर नहीं, दिल्ली इसकी भौगोलिक सरहदों तक है। जब भी दिल्ली के विकास की बात आती है वो सिर्फ़ समयपुर बादली से हुडासिटी सेंटर या वैशाली से नॉएडा बॉर्डर तक की बात करते हैं। कभी करनाल बायपास पर खड़े हो चारों ओर नज़र घुमा कर देखो, क्नाट प्लेस वाले सफ़ेद गलियारे ज़ेहन से उड़न छू हो जाएँगे। कभी बदरपुर बॉर्डर की कच्ची बस्तियाँ देखो, अकबर रोड की ठंडी हवा की मिसाल देनी भूल जाओगे। दिक़्क़त ये है कि विकास सिर्फ़ वहीं तक आ रहा जहाँ तक मेट्रो आ रही। विकास कब से मेट्रो का मोहताज़ होने लगा।

जब भी दिल्ली आता हूँ दिल्ली के चेहरे में से बेरोज़गारी वाली दिल्ली को उघाड़ने की कोशिश करता हूँ। लगता है कोई कोई कोना बिल्कुल वैसा है जैसा छोड़ा था। बिल्कुल हमारे अंतर्मन के उन अंधेरे कोनों जैसा जायज़ नाजायज़ के बीच की परिभाषा को तलाशता। हम लाख भाग लें लेकिन अपने अतीत से कभी नहीं भाग सकते। अतीत कभी भी शून्य नहीं होता। अतीत पर या तो गर्व हो सकता या ग्लानि। बीच का कुछ नहीं। वैसे ही जैसे किसी ने कहा था की बम्बई से या तो प्यार हो सकता या नफ़रत। हालाँकि मैं इस बात से कभी इत्तेफ़ाक नहीं रखता। क्यूँकि मैंने बम्बई में प्यार और नफ़रत के इतर भी एक चेहरा देखा है- मजबूरी का चेहरा। ये चेहरा मुझे रोज़ लाखों लोगों में दिखाई देता है। जो बस मजबूरीवश अपने आप को उस शहर में ढो रहे हैं। 

लोकल ट्रेन के गलियारों में कुंडों पर झूलती असंख्य आकृतियाँ या तो मोबाइल फ़ोन में कैंडी क्रश खेल खेल अपनी आँखों का कीमा बना रही होती हैं या कानों में ईयरफ़ोन ठूँस कर अपने दिमाग़ को ज़ोम्बी बनाने तक की ज़िद में रहती हैं। आधुनिकता के भेस में बीमारियाँ घर कर  रही हैं और डॉक्टर , मनोवैज्ञानिक , counsellers, आर्ट औफ़ लिविंग शिविंग की दुकानें हर मौसम चल रही। मेंटल हेल्थ के नाम पर मेंटल दुनिया पैदा की जा रही है। सारे पागल हो कर मरेंगे। आने वाली पीढ़ियाँ आत्मनिर्भर नहीं, परजीवी और डिप्रेसिव पैदा होंगी। 

(बात दिल्ली से शुरू हुई थी और कहाँ तक पहुँच गयी। बस निजी विचार हैं और कुछ नहीं )

~डॉ.गुरप्रीत सिंह

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Comments

Anonymous said…
Absolutely....Even i have observed and felt similar thoughts for Mumbai...aapne badi sehejta se ye baatein likh di 👍🏻👏🏻💯%

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