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Showing posts from December, 2019

मेरी बेबे ‘प्रकाश कौर’

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आज मेरी दादी प्रकाश कौर की 9वीं पुण्यतिथि है। 22.12.2010 की काली शाम लगभग सवा 5 बजे मेरी प्यारी दादी इस दुनिया को अलविदा कह गई थी।....मेरी दादी का जन्म 1927 को बहावलपुर के नूरसर चिश्तियाँ (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। 12 वर्ष की छोटी सी उम्र में मेरे दादाजी स्व.स. अमर सिंह जी से शादी हुई जो उम्र में मेरी दादी से 2 साल बड़े थे और श्रीगंगानगर निवासी थे।इसलिए शादी के बाद दादी श्रीगंगानगर (राजस्थान) में ही रहने आ गई और अंतिम श्वास तक लगभग 70 साल श्रीगंगानगर में ही रहीं। लिखने बैठूँ तो बहुत कुछ है मेरी बेबे के बारे में, ....(हम पंजाबियों के घरों में माँ या दादी को प्यार से बेबे ही बुलाते हैं, हमारे घर में दादी को हम सब बेबे बुलाते थे)......बहुत कुछ इसलिए है बताने को.......क्यूँकि बचपन से ही बहुत क़रीब रहा हूँ बेबे के। सुबह बेबे को मक्खन निकालते देखने से लेकर , चरख़ा चलाने, चक्की पर आटा पीसने, दाल दलने, छोलिया निकालने, सरसों का साग सुखाने, आलू चिप्स और लाल साबुत मिर्च धूप में सुखाने, गेहूँ , बाजरा , मक्का संग्रहण हर बात में बेबे की हाज़िरी अनिवार्य सी होती थी।....घर में कोई भी काम होता, ...

मन जीते - जग जीत

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कल गर्व के स्कूल में स्पोर्ट्स डे की कोई रेस थी और सब बच्चों को उस हिसाब से ट्रैक सूट पहन कर आने की हिदायत दी गई थी।....हमारा गर्व परसों रात से ही ट्रैक सूट पहनाने की ज़िद पर अड़ गया। ख़ैर ! जैसे तैसे रात बीती।....कल ख़ुशी ख़ुशी स्कूल गया...जाने से पहले का ये फोटोशूट है....मुझे फ़ोन पर आवाज़ record करके भेजी कि “मामा मैं प्लेअर बन गया ! मैं मिल्खा सिंह बन गया!”....मेरा तो आवाज़ सुन कर ही दिन बन गया था।.. ...छुट्टी होने पर घर आया तो बोला कि i am winner...मैं जित्त गया!...मैं फ़र्स्ट आया!....इसके टीचर्ज़ से पूछने पर पता चला कि ये रेस में दौड़ता था और जब सब इसके साथ दौड़ने लगते तो रुक कर उन्हें देखता और ख़ुश होता।....इतनी कम उम्र में इसकी इस सरलता पर बहुत सारा प्यार और अशेष शुभकामनाएँ क्यूँकि आजकल की गलाकाट प्रतिभागिता में जिस रशक से हम एक दूसरे से आगे निकल कर जीतना चाहते हैं .....हमें मेरी इस प्यारी सी नन्ही जान ‘गर्व’ से बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत भी है और अनुसरण करने की आवश्यकता भी।...मुझे ख़ुशी है कि इस आत्मिक सुख के साथ वो सच में सबसे जीत गया है और आगे भी बहुत सी दौड़ें अपने मन के...

इंदौर- मेरे देश का सबसे साफ़ शहर

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आज 07 दिसम्बर 2019 इंदौर की धरती पर हूँ। हाँ , वही इंदौर जो पिछले तीन वर्षों से निरंतर भारत के सबसे स्वच्छ शहर के तगमे को सम्भाले है। नीचे दी तस्वीर में दिखायी इंदौर की इस गली को ‘छप्पन’ बोलते हैं ...या दूसरे शब्दों में कहूँ तो “जीभ के चटखोरे लोगों का स्वर्ग”... इंदौर में ज़्यादा कुछ देखने लायक़ नहीं मगर खाने पीने को बहुत विकल्प हैं ....हमने भी यहाँ की विजय चाट से हींग वाली पेटीज का आनंद लिया। मौसम में बहुत ज़्यादा हरारत नहीं आज इसलिए किंग कॉफ़ी से थोड़ी कोल्ड कॉफ़ी भी गटक ली।...😂😂... इंदौर की धरती को पवित्र किया 😂😂❤️❤️