08 November 2018 When I Visited A School In Sharon(USA)
08 नवम्बर 2018
कल रात यहाँ शेरोन (अमेरिका) में मेरी छोटी भतीजी हनाह के स्कूल ''Heights Elementary" में Parent Teacher Conference के मौके पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ।.... जी हाँ ... सुनने में जरूर अटपटा लग रहा होगा लेकिन सच में .... 'रात ' ही कहा है मैंने।.... यहाँ अमेरिका में इतने व्यवस्थित शिक्षा तंत्र को देख कर हैरानी और खुशी दोनों हुई। यहाँ पर हमारे हिंदुस्तान की तरह की पेरेंट्स मीटिंग की तरह से इतर परिजनों का अपॉइंटमेंट होता है...यानि स्टूडेंट की सारी जन्म कुंडली तैयार करके परिजनों के सामने पेश की जाती है.... छात्र में आ रहे व्यवहारिक बदलावों की ओर भी परिजनों का ध्यान आकृष्ट किया जाता है ताकि कुछ भी अनहोनी होने से समय रहते पहले उसे रोका जा सके।....1 घण्टे की इस कांफ्रेंस में हनाह की हैंडराइटिंग, रीडिंग, स्पीकिंग, व्यवहारिक ज्ञान, पारस्परिक सम्बन्ध क्षमता, खेल, भाषा ज्ञान, नैतिक मूल्य, निर्णय क्षमता और सहपाठियों के साथ सम्बन्धों को लेकर 20-25 पृष्ठों के प्रारूप पर चर्चा देख सुन ढंग रह गया।.... एक और बात जो मुझे खास लगी वो यह थी कि उसके क्लासरूम में उसकी एवं अन्य छात्रों की किताबों और उत्तरपुस्तिकाओं को देख मैं आश्चर्यचकित था.... पूछने पर पता चला कि मेरे देश की तरह यहाँ बच्चों पर 10-12 किलो के बस्ते किताबों का बोझ नहीं होता.... सब कुछ स्कूल में ही मिलता है और वहीं छोड़ कर आना होता है।.... घर के लिए सिर्फ थोड़ा सा होमवर्क जो कि ऑन लाइन सबमिट करना होता है....बाकी समय अन्य गतिविधियों या रूचि क्लासेज या खेलकूद में बिताना होता है।.....कुल मिलाकर बच्चों को रट्टू तोता बनाने की बजाय उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है।....और स्कूल की साफ सफाई और सुंदरता पर तो क्या ही लिखूँ.... सलाम है ऐसे देश को....और ऐसी शिक्षा प्रणाली को।
कल रात यहाँ शेरोन (अमेरिका) में मेरी छोटी भतीजी हनाह के स्कूल ''Heights Elementary" में Parent Teacher Conference के मौके पर जाने का अवसर प्राप्त हुआ।.... जी हाँ ... सुनने में जरूर अटपटा लग रहा होगा लेकिन सच में .... 'रात ' ही कहा है मैंने।.... यहाँ अमेरिका में इतने व्यवस्थित शिक्षा तंत्र को देख कर हैरानी और खुशी दोनों हुई। यहाँ पर हमारे हिंदुस्तान की तरह की पेरेंट्स मीटिंग की तरह से इतर परिजनों का अपॉइंटमेंट होता है...यानि स्टूडेंट की सारी जन्म कुंडली तैयार करके परिजनों के सामने पेश की जाती है.... छात्र में आ रहे व्यवहारिक बदलावों की ओर भी परिजनों का ध्यान आकृष्ट किया जाता है ताकि कुछ भी अनहोनी होने से समय रहते पहले उसे रोका जा सके।....1 घण्टे की इस कांफ्रेंस में हनाह की हैंडराइटिंग, रीडिंग, स्पीकिंग, व्यवहारिक ज्ञान, पारस्परिक सम्बन्ध क्षमता, खेल, भाषा ज्ञान, नैतिक मूल्य, निर्णय क्षमता और सहपाठियों के साथ सम्बन्धों को लेकर 20-25 पृष्ठों के प्रारूप पर चर्चा देख सुन ढंग रह गया।.... एक और बात जो मुझे खास लगी वो यह थी कि उसके क्लासरूम में उसकी एवं अन्य छात्रों की किताबों और उत्तरपुस्तिकाओं को देख मैं आश्चर्यचकित था.... पूछने पर पता चला कि मेरे देश की तरह यहाँ बच्चों पर 10-12 किलो के बस्ते किताबों का बोझ नहीं होता.... सब कुछ स्कूल में ही मिलता है और वहीं छोड़ कर आना होता है।.... घर के लिए सिर्फ थोड़ा सा होमवर्क जो कि ऑन लाइन सबमिट करना होता है....बाकी समय अन्य गतिविधियों या रूचि क्लासेज या खेलकूद में बिताना होता है।.....कुल मिलाकर बच्चों को रट्टू तोता बनाने की बजाय उनके सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जाता है।....और स्कूल की साफ सफाई और सुंदरता पर तो क्या ही लिखूँ.... सलाम है ऐसे देश को....और ऐसी शिक्षा प्रणाली को।
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