‘गर्व’ के स्कूल का पहला दिन- 08 जुलाई 2019






आज बहुत बड़ा दिन है ....हमारे परिवार में एक बड़ा अवसर  ....लेकिन साथ ही सुबह से मेरा मन भी ख़राब रहा .....आज मेरे भांजे , मेरी जान ,मेरी आँख के तारे गर्व प्रताप सिंह का पहला दिन था स्कूल में ....वो इतना छोटू, इतना कोमल और इतना प्यारा दुलारा है हम सबका ....और ख़ास करके मेरी तो साँस ,धड़कन और रग रग में इतना जज़्ब है कि उसके स्कूल जाने के ख़्याल ने ही कल रात से मुझे बेचैन सा कर दिया ....पिछले महीने जब उसके जन्मदिन के अवसर पर छुट्टी गया था तो मुझसे बोला था ‘’मामा! मैं स्कूल नहीं जाना , मेनू सब कुछ आंदा है ’’और फटाफट कापी पेन लेकर कुछ लिखने लग गया....उस नन्ही सी 3 साल की जान की पेन की पकड़ और कापी पर लिखे हुए पैटर्न को देख कर ही मैं हैरान हुआ जा रहा था ....लगा जैसे किसी पिछले जन्म का विद्वान रहा हो ......या फिर कोई दिव्य पवित्र रूह ....मन में कई सवाल थे कि 3 साल का नन्हा बच्चा इतना सिमेट्रिकल कैसे लिख सकता है ...और पता नही कौनसी प्राकृत उर्दू सी भाषा लगी ......मैंने मारे ख़ुशी और संवेदना के उसे चटपट छाती से लगा लिया तो बोला ‘’मामे! मेनू अपने नाल बोमबे लैजा, मैं ओथे तेरा पुत्त बन के रहूँगा ,मैं स्कूल नही जाना, मेरा जी नहीं लगना तेरे बिना ’’......आँखें द्रवित थी ये सब सुन के ......कल रात से रह रह कर ये ख़्याल मुझे विचलित कर रहे थे कि इस नन्ही जान पर ये कैसा बोझ डालने लगे हैं हम सब ....एक साल और रुक जाते ....आजकल ये प्ले स्कूल का नया ही शुगल चालू किया है अर्थवादी प्राइवट स्कूलों ने कि ढाई तीन साल की उम्र के मासूमों को स्कूल ड्रेस और 
टिफ़िन बैग के साथ झोंक दो बस तथाकथित मॉडर्न शिक्षा  प्रणाली में .....और फिर घोड़ों की रेस उसे भौतिकवादी गधा बना कर ही छोड़ती है .....हमारे समय पर तो 4-5 साल तक बच्चा घर पर खेलता था ....फिर सीधा नर्सरी में दाख़िला दिलाते थे....गर कोई कोई चाहता तो यहाँ तक कि नर्सरी क्लास भी घर पर ही करवा कर स्कूल भेजता अपने बच्चे को ........आजकल तो नर्सरी से पहले ही एक डिग्री कर लेता है मासूम .....25-30 साल में कितना बदलाव गया है ना ?....ख़ैर अपनी बात पर आता हूँ ......बेचैनी में कल की रात कटी और सुबह हुई। सुबह उठ कर गर्व को फ़ोन लगाया....मेरी बहन मीनु ने बताया कि रोज़ 9 बजे उठने वाले नन्हे गर्व को आज स्कूल के लिए 7 बजे ही उठाना पड़ा है ....नींद पूरी तरह से उस पर हावी है.....एक घंटे में उसको नहला धुला कर तैयार किया गया है.....इस बीच उसने ड्रेस के कड़क कपड़े की उसके नन्हे  कोमल बदन पर चुभने की शिकायत भी की है.......मेरी आँखें फिर छलछला आयीं....मैं उस से बात करने को मरा जा रहा था ....क्यूँकि आज का दिन उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन था और मैं उसके पास नही था ....ख़ैर उसकी माँ और नानी उसके पास थे .....विडीओ कॉल पर उसे देख मन ख़ुश हुआ जाने कैसे इन लोगों ने उसे समझा बुझा कर स्कूल के लिए तैयार किया था ....मैं वहाँ होता तो शायद कहानी कुछ और होती ...पता चला कि सुबह उठते ही फ़रमाइशें तैयार थी गर्व की .....”दही पा दो टिफ़िन , ....मक्खन वी पा दो परौंठे नाल .....मैं बर्फ़ी वी खाऊँगा लंच .....परौंठे दो पाइयो....जे इक किसे होर बच्चे ने खा लया ता मैं की खाऊँगा’’...इत्यादि ....मैंने उसे कार से उतरते देखा ........चहक रहा था शायद किसी के कहने पर.....नीली  ड्रेस में स्कूल जाता हुआ गर्व मुझेबाय बायबोलता हुआ जैसे  धिक्कार रहा था कि ‘’तुम क्यूँ नहीं आये मामा??”.....उसेगॉड ब्लेस यूकह विदा किया.....दिल ने बार बार कहा  ......’’ गर्व तुम बहुत आगे जाओगे.....तुम्हारे लिए आज फ़रिश्ते करोड़ों नेमतें ले आसमान से उतरेंगे....’’ इन्हीं ख़्यालों में फिर ऑफ़िस के लिए तैयार होते हुए आज दस्तार बार बार मेरे शीशे में धुँधली हो रही थी........


~डॉ.गुरप्रीत सिंहप्रीत’/08.July2019/ संवेदनाओं का रोलर कोस्टर/बम्बई डायरी

Comments

Sagar said…
वाह बेहतरीन रचनाओं का संगम।एक से बढ़कर एक प्रस्तुति।
BhojpuriSong.in

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