वर्ल्ड कप 2019- Tryst With Destiny





14 जुलाई 2019 ....वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबला....क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में आज बड़ा दिन था, क्यूँकि आज इतिहास जो लिखा जाना था....इतिहास की इस किताब के दोनों खुले कोरे पन्नों पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड नाम की इबारतें लिखी थी ....हाशिये के दोनों तरफ रोमांच था और कोरे सफ़हों पर शहंशाही की होड़.....सिक्का उछला और गिरा विलियमसन की झोली में , (जिसे पता था कि इंग्लैंड का इतिहास चाहे 79 और 92 का फाइनल हो या 87 का सेमीफाइनल, पीछा करने में हारने का ही रहा है), खैर विलियमसन ने पिटाई करना चुना .....और 241 रन बोर्ड पर टांग दिए या यूँ कहूँ इंग्लिश गेंदबाज़ों ने 241 पर ही रोक दिया।.....उधर इंग्लैंड की पारी शुरू हुई। न्यूजीलैंड के सीमरों ने बॉल को हवा में तैराना शुरू किया......ट्रेंट बोल्ट, मैट हैनरी, फर्गुसन, नीशम, ग्रन्डहोम सब टूट पड़े।.....आननफानन में 86 रन पर 4 विकेट गंवा इंग्लैंड भी अब पानी माँगती नज़र आई। ......अब क्रीज़ पर थे दुनिया के बेहतरीन तूफानी खब्बू आल राउंडर- बेन स्टोक्स और अड़ियल जुझारू विकेटकीपर - जोस बटलर। ....लेकिन परिस्थिति क्रीज़ पर टिक कर 44 साल पुराने सपने को पूरा करने की थी।......पलड़ा न्यूजीलैंड के पक्ष में जाता दिख रहा था। आधे से ज्यादा रन बनाने को पड़े थे और आधे से ज्यादा ओवर पड़े थे.....मैच दिखाते हुए कैमरा बार बार उल्लासित कप्तान विलियमसन को दिखा रहा था वही विलियमसन जिसने सेमीफाइनल मुकाबले में इंडिया को बाहर किया था....वही विलियमसन जिसने अंडर-19 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में विराट कोहली की टीम से टक्कर ली थी.... वही विलियमसन जो 2015 का वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबला ऑस्ट्रलिया से हारा था...... इस से परे लॉर्ड्स के गैलरी की खिड़की से झाँकती दो संजीदा उदास आँखें भी कैमरे ने कैद की....उस  शख़्स की आँखें जो इंग्लैंड में पैदा नहीं हुआ था। जिसने अपना पहला विश्व कप भी किसी और देश (आयरलैंड) से खेला था, लेकिन 13 साल की उम्र में इंग्लैंड की ओर से खेलने की सरेआम इच्छा जता सबको हैरान किया था। ये  इंग्लैंड के सबसे संजीदा कप्तान इयोन मोर्गन थे जो अभी अभी अपना विकेट गंवा पवेलियन में उदास बैठे थे।.....खैर अगले डेढ़ घण्टे में बटलर और स्टोक्स ने 20 ओवर में 103 रन बना कर मैच पलट दिया था। फिर भी 44वें ओवर में जब दोनों के अर्धशतक पूरे हुए तो दोनों ने ही कुछ खास जश्न नहीं मनाया।.....क्योंकि स्क्रिप्ट में क्लाइमेक्स अभी बाकी था।.....36 गेंद में 53 अभी भी चाहिए थे.....उधर विलियमसन ने अब तक होंठ नाखून सब साफ कर दिए थे।.....45वें ओवर की 5वीं गेंद फर्गुसन लेकर दौड़ा..... बटलर की बिल्ली आँखों ने आउटसाइड ऑफ स्टम्प बॉल को खीर की तरह झप्पटा।.....कवर के ऊपर से मारा ....गिरती हुई गेंद को पिछले वर्ल्ड कप के मुख्य गेंदबाज रहे टिम साउथी ने लपक लिया..... मैच फिर से जी उठा.....न्यूजीलैंड समर्थकों ने सारा लॉर्ड्स सर पर उठा लिया था....अब 31 बॉल पर 46 चाहिए थे।.....ये मैच कुछ कुछ इंडिया न्यूजीलैंड के सेमीफाइनल मुकाबले सा होता जा रहा था वही 18 गेंद में अब 34 रन चाहिए थे। ........इन सबके बीच हेलमेट से झाँकती 2 आँखें और भी थी उस खिलाड़ी की जो न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में पैदा हुआ लेकिन क्रीज़ पर इंग्लैंड की विश्व कप उम्मीद बन कर खड़ा था.....बेन स्टोक्स.....वो लड़का जो 12 साल की उम्र में न्यूज़ीलैंड से इंग्लैंड आ गया था आज 'क्रिकेट के मक्का' में न्यूज़ीलैंड को ही पानी पिला रहा था।.....49वें ओवर की चौथी गेंद इस मैच की सबसे सुनहरी गेंद थी जब डीप मिड विकेट पर खड़े ट्रेंट बोल्ट ने स्टोक्स का आसान कैच लेते हुए बाउंड्री नाप ली थी।....स्टोक्स ने इस मौके को भुनाया और मैच टाई पर समाप्त हुआ।.....अभी सुपर ओवर का रोमांच बाकी था।.... स्टोक्स और बटलर बैटिंग करने आये और 15 रन टाँग दिए।.....अब न्यूजीलैंड को 16 रन बनाने ही थे क्योंकि बराबरी की स्थिति में नियम मुताबिक इंग्लैंड विजेता हो जाता।..... दर्शकों का लहू जम गया था.....कितना अजीब खेल था ना न्यूज़ीलैंड पहले बल्लेबाजी करके भी पीछा करने उतरी थी।.... बल्ला था मार्टिन गप्टिल और निशम के हाथ में....वही गप्टिल जिसने सेमीफाइनल मुकाबले में धोनी को रन आउट किया था...वही गप्टिल जो पिछले वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया से फाइनल में हार कर बच्चों की तरह रोया था।..... इन सबके बीच कैमरे ने दो और आँखें भी कैद की.... उस इंसान की जिसका यह पहला विश्व कप था, जो स्टोक्स और मॉर्गन की तरह इस देश (इंग्लैंड) से भी नहीं था....जिसे 7 साल रेजिडेंट नियम के मुताबिक 2022 में इंग्लैंड टीम में चुना जाना था....पर तकदीर को कुछ और ही मंजूर था..... इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ICC की गाइडलाइन्स में आई तब्दीली के चलते पिछले से पिछले महीने ही इस खिलाड़ी को टीम में शामिल किया था.....जोफ़रा आर्चर.... जी हाँ..... सवा छ फुट का वेस्टइंडियन जोफ़रा आर्चर .....जिसे वर्ल्ड कप इतिहास का पहला सुपर ओवर फेंक इतिहास रचना था।.....नीशम ने पहली 5 गेंदों में 14 रन बनाए। अब आखिरी गेंद पर गप्टिल को 2 रन चाहिए थे......सारे मैदान ने हल्ला काट दिया था..... हर कोई पागल हुआ जा रहा था..... सुपर ओवर की आखिरी गेंद बची थी .....अभी तक नहीं पता था कि कौन जीतेगा।.....आर्चर क्या फेंकेगा....यॉर्कर सही से पड़ नहीं रही....स्लो फेंकेगा या बाउंसर या वाइड.....खैर... कुछ रुक कर.... लम्बे काले आर्चर ने छरहरे हिरण सरीखी लम्बी लम्बी कुलाँचे भरनी शुरू की....आज वो हिरण नहीं ,काला बारहसिंघा था जो दो घूँट पानी के लिए शेर तक से खेल जाताहै वो भी अकेला.......फ़ुल लैंग्थ बॉल गप्टिल के पैड पर पड़ी....गप्टिल ने सामने वाला पैर हटा सधे हुए सर से डीप मिड विकेट की तरफ खेल दिया....क्योंकि दो रन चाहिए ही थे इस बॉल पर......जैसे जैसे गेंद फील्डर की तरफ जा रही थी.....दर्शक पागल हुए जा रहे थे....जैसन रॉय चीते सी फुर्ती दिखा बॉल उठाई और जैसे तैसे खराब लेकिन तेज़ थ्रो कर ही दिया.....उधर बटलर भी गेंद को झप्पट विकेटों पर तैर गया।.....इंग्लैंड ने बाजी मार ली थी.....घड़ी की सुईयां 12 बजा रही थी और तवारीख़ 15 होने को थी.....संयोग की बात है.....मुझे इतिहास की एक और ऐसी ही 15 तवारीख़ की मध्यरात्रि याद हो आई.....और नेहरू के शब्द भी.........
At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom......  सोच रहा हूँ आज ये शब्द इंग्लैंड के लिए कितने उपयुक्त और तर्कसंगत साबित हो रहे हैं। जिस देश का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था उसका उदय कितने सालों बाद आज हुआ।.....गूच, बॉथम, होब्स, बॉयकॉट, वॉन, स्टीवर्ट, बेल, एंडरसन, गॉफ, पीटरसन, कुक सब कोई आज दुआएं देंगे .....तुम्हें बधाई हो इंग्लैंड.....आज इतिहास तुम्हारा हुआ।

Comments

Unknown said…
Well written as writer is the part of game. Selection of words at par excellence, script is excellently pen down. Keep progressing

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