मेरी बहन मीनू और उसका नोनू

बात बचपन की है और बेहद दिलचस्प है। मेरी बड़ी बहन मीनू और मुझमें दो साल का फ़ासला है।नीचे दी गई एक तस्वीर मेरे जन्म से पहले की है जिसमें मीनू के हाथ में एक खिलौना है। ये गुडडा जब घर आया तो मीनू हर समय इसको अपने साथ रखती। उठते बैठते , खाना खाते , अपना छोटा सा स्कूटर चलाते या सोते हुए भी यह खिलौना उसकी गोद में या बग़ल में रहता। ननिहाल जाती तो भी बैग में रखवाती......शिद्दत की इंतहा ये थी कि मीनू ने इसका नामकरण भी कर दिया था- ‘’नोनू’’..... सारा दिन अपने नोनू से तोतली ज़बान में बातें करती उसका हाल चाल पूछती, उसे बुखार होता तो झूठ मूठ की दवाई पिलाती .....कभी ख़ुद रूठ जाती कभी उसे मनाती ......कहने का मतलब नोनू अब मीनू की दुनिया था और वो अपनी इस दुनिया में इतनी ख़ुश थी कि घर में दादा दादी मम्मी पापा चाचा ताऊ सब उसका और मूक नोनू का काल्पनिक संवाद सुनते और ख़ूब मज़े ले कर हँसते। दादी पूछा करती “अज्ज तेरे नोनू ने की खाना ?”.....”नोनू नहा लया?” .......”नोनू ने कपड़े नहीं बदले?”......जवाब मीनू के पास चटपट तैयार होते।.....कभी कभी दादी झुंझला कर पूछ बैठती “तैनूँ चकिए या तेरे नोनू नू ?”(तुझे उठाऊँ या तेरे नोनू को).....  दादी पूछती ....ए कौन है .....कीथो ल्यायी हैं  ....की लगदा है तेरा ......जवाब में मीनू बोल उठती- ए मेरा नोनू वीरा है.....बाबाजी तो ल्यायी हाँ। बहरहाल मेरे आने की भी तैयारी हो गई थी।..... रात्रि माँ प्रसव पीड़ा में हॉस्पिटल के कमरे में इधर से उधर घूम रही थी....मीनू पास के बेड पर अपने नोनू के साथ बैठी थी.....उसे ये बताया गया था कि मम्मी   के पेट में दर्द है इसलिए हॉस्पिटल ले कर आए हैं ,चुपचाप सो जा।.....मीनू को भूख लगी थी तो बोल उठी ....”मम्मी ! नोनू दूध!” (ये भी मीनू का कोई भी चीज़ माँगने का एक तरीक़ा होता था 🙂 ) ....ख़ैर फ़रमाइश पूरी की गई और शीशी से दूध पी कर मीनू अब सो चुकी थी। रात 2 बज कर 35 मिनट पर मेरा जन्म हुआ। सुबह आँख खुलते ही मीनू को मेरे पास लाया गया और मम्मी ने मेरी ओर इशारा करके पूछा “ए कौन है मीनू?”......मीनू की आँखों में कुछ चमका और दो साल के बाल मन की समझ की परिधि में एक ही ख़्याल उमड़ कर ज़बान पर आया .....”ए नोनू है!!!!!!”.......झटपट साथ वाले कमरे से खिलौना उठा कर लाई.....कभी उसको देखती कभी मुझे....... और फिर उसे वह बेजान और मूक नोनू अस्वीकार्य हो गया ; उसकी बाल-बुद्धि ने जान लिया था कि नवजात बच्चा ही उसका असली नोनू है ।इस तरह मेरा छोटा नाम मेरी बहन मीनू ने ही रखा जो घर में भी सबको स्वीकार्य होना लाज़िमी ही था।

(वाक़या माँ की ज़ुबानी, मेरी सिर्फ़ कल्पना और शब्द)

-प्रीत/ रक्षाबंधन पर प्यारी बहन को समर्पित









Comments

आप शब्दों के जादूगर हैं
बहुत अच्छा लगा पढ़ कर !
मोबाइल ते टाइप करण दा पंगा है , कॉमेंट मेरा ए उप्पर वाला बड़ा फ़ॉर्मैलिटी वाला लग रहा है .कोई ना बाक़ी फ़ोन ते
Dr Parveen Chopra Sir शब्दों के जादूगर तो आप हैं और मेरे सबसे आदरणीय औरदिल के क़रीब भी । उम्र का फ़ासला भी हमें अच्छा दोस्त बनने से नहीं रोक सका। शुक्रिया सर।यूँ ही मुझे प्यार करते रहना।
Unknown said…
Heart touching story ...hamko to aapnA bchpn yaad hi nhi
Priyanka Mishra said…
Kya baat hai guru aapki kahani toh dil ko chu gyi....

Popular posts from this blog

मैंटल आधुनिकीकरण

बिंदी वाली गुड़िया

कैटरपिलर/ बम्बई डायरी/ 10-09-2016