समंदर सा बड़ा भाई
बड़े भाई ! उस दिन तुम्हें देश ,तुम्हारी ज़मीं पर अटलांटिक महासागर को निहारते लगा था तुम भी उस समंदर से हो ....पाक, निर्मल, अथाह, असीम और अपरिमित प्रेम से ओत प्रोत। लेकिन तुम्हारी तुलना प्रशान्त महासागर से करूँगा क्योंकि तुम्हारे दिल में सिर्फ मेरे ही नहीं अपितु सभी के लिए निश्चल और असीम प्रेम भरा हुआ है।.......सच में तुम मेरे प्रशांत महासागर हो भाई! और मैं अटलांटिक सरीखे किसी चँचल महासागर सा हूँ। जिस में संवेदना, रूदन, विरह सरीखे कई भावों का व्यस्त यातायात है। ........तुम और मैं ध्रुव जैसी किसी ठंडी जगह पर दोनों हाथों से एक दूसरे को कस कर गले लगाना चाहते हैं .....लेकिन वो तो ध्रुव हैं ना..... हमारी बाजूएँ निशक्त पड़ जम जाती हैं ..... हम तड़पते हैं ,अपनी अपनी तकदीर को निहारते हैरां परेशा खुद को ही गले लगाने के लिए लौट आते हैं अपने अपने किनारों , अपनी अपनी हदों से..... और सोचते हैं क्या है हमारे दरम्यां ये समय का निष्प्राण टापू , .....कोई संवेदनहीन धरती.....सुना है कुछ लोग ,कुछ गाड़ियाँ रोज़ इस पर दौड़ती हैं.... काश कि हम इसे चीर गले मिल सकते।..... मेरे प्रशान्त ! सुना है इस ज़ालिम धरती को 'अमेरिका' कहते हैं।
जन्मदिन मुबारक भाई ....
#Preet





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