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Showing posts from September, 2019

पिता के जन्मदिन के अगले दिन

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कल पापा का जन्मदिन था .....उन्हें एक चिट्ठी भी लिख कर भेजी है कल .....ये शायद पहली चिट्ठी है जो मैंने पापा के लिए लिखी। फ़ेस्बुक पर कुछ तस्वीरें भी साझा की थी, उनमें से एक तस्वीर पर कुछ लिखा था ...सोचा यहाँ ब्लॉग पर भी साझा कर लूँ.... हाँ ,ये बाजुएँ वही हैं जिन्होंने ताउम्र मुझे कुव्वत-ए-परवाज़ दी। हाँ ये घड़ी वही है जिसने ख़ुद थोड़ा थम कर मेरे समय को ख़ुद से आगे निकलने के मौक़े दिए। हाँ, मेरे भविष्य की खेती को सींचने वाला मेरे पिता की पीठ पर आया ये पसीना भी बहुत ख़ास है और कमरतोड़ मेहनत से लथपथ इस बुशर्ट पर दुनिया की तमाम बादशाहतें क़ुर्बान........ Happy Birthday Papa......love you so much.

सुर्खी-बिंदी

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परसों दिल्ली के सुभाष नगर PVR में गुरनाम भुल्लर और सरगुन मेहता अभिनीत पंजाबी फ़िल्म “ बिंदी सुर्खी “ देखने का सबब बना।....ज़्यादातर मेरे साथ ऐसा ही होता है कि बिना किसी फ़िल्म का ट्रेलर देखे मैं कभी भी कोई फ़िल्म देख आता हूँ। फ़िल्म पंजाबी है लेकिन बात हिंदी में कहूँगा ताकि ज़्यादातर लोग जो भाषागत बाध्यता के कारण पंजाबी फ़िल्मों से महरूम रह जाते हों उन तक भी इसकी बात पहुँचे।.... फ़िल्म की कहानी सुखविंदर (गुरनाम भुल्लर ) की पत्नी रणदीप(सरगुण मेहता) के सपने के इर्द गिर्द घूमती है .....वो सपना जो सिर्फ़ उस अकेली रणदीप का नहीं उस जैसी कई लड़कियों का हो सकता है .....चूँकि फ़िल्म ग्रामीण अंचल की है इसलिए सुखविंदर का किरदार कम पढ़े लिखे लेकिन बेहद संजीदा ग्रामीण पति का दिखाया है जो स्वभाव से सरल तो है ही ....साथ ही रणदीप के सपनों का संरक्षक भी।कैसे वो मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी बिना विचलित हुए रणदीप का साथ देता है, बिना कोई सवाल किए उसके पंखों को उड़ान देता है , यह अपने आप में बड़ी बात है.........एक आदर्श पति , भाई और दामाद की शक्ल में सुखविंदर कथानक को और भी सुदृढ़ता दे रहा है। ‘अभ...

ताजमहल- इक ज़िद इक सपना

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वैसे एक कहावत है इंसान ग़लतियों का पुतला होता है ....सहमत हूँ , लेकिन मेरा ख़्याल है हर इंसान सपनों का भी पुतला होता है। हरेक सपने की अपनी अपनी उम्र होती है क्यूँकि ज़िंदगी के सफ़र में हर एक अवस्था और बौद्धिक स्तर पर सपने भी अनोखे और अलाहिदा होते हैं।.....कुछ सपने हमारी सोच और समझ के साथ पनपते हैं तो कुछ सपने हम नन्ही आँखों से बचपन में ही देख लेते हैं।....’ताजमहल को देखना’ भी उन नन्हे दिनों के सपनों में से एक है..... जब स्कूल में एक कार्यशाला का आयोजन हुआ था ....मेरी बहन मीनू मुझसे दो जमात आगे थी स्कूल में।हम दोनों ने ही उस कार्यशाला में भाग लिया ...विभिन्न चित्रों को ट्रेसिंग/बटर पेपर की सहायता से ट्रेस करके बनाया और फिर उस बटरपेपर को सरसों के तेल में भिगो कर के उन चित्रों को oilपेण्टिंग की मानिंद फ़िक्स करके अपनी अपनी copies में यादगार बना रख लिया था। .....उन चित्रों में ताजमहल का चित्र सबसे हूबहू बना था इसलिए ताज की छाप सरसों के तेल से सने उस बटर पेपर जैसे मेरे बाल अंतर्मन पर भी ज़िद्दी सी फ़िक्स कलाकृति की तरह छप गई थी.....सरकारी नौकरी में चार साल से होने के बावजूद कभी ताज को निहा...

Chutki हैना का जन्मदिन

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Today is the 8th Birthday of my little niece Harshneet Kaur (Hannah).....Wish You Happy Bday our little princess..... she is so cute and smart that i can’t even imagine and forget my U.S. trip memories without the small small happening moments i enjoyed with her. May she live the longest. .....छुट्टी वाले दिन चुपके चुपके बर्फ़ के उन दिनों में अमेरिका की सड़कों पर तेरी ऊँगली पकड़ कॉफ़ी के लिए निकल जाना ....या फिर तेरा किताब पढ़ते पढ़ते चुपके से मुझे Barns & Nobles की उस प्यारी सी लाइब्रेरी में देखने आना कि चाचू बैठा है ना ?गुम तो नहीं हो गया कहीं। हाहाहाहाहा....या फिर गेम सेक्शन में जा कर ५० -५० सेंट के सिक्कों को किसी बड़े अर्थशास्त्री की तरह मेरे हाथ से ले ख़र्च कर आइस हॉकी खेलना....और कोई इनाम पा जाने पर खिलखिला जाना.....या newyork की बर्फ़ीली सड़कों पर रात को भी मेरी गोद में चढ़ने की ज़िद करना.......और क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री के शिखर की लाइट्स मेरी गोद में चढ़ कर लगाना.....दिवाली पर रंगोली बनवाना.....चुपके चुपके होमवर्क करके मेरे साथ backyard में क्रिकेट खेलना.....ख़रगोश पकड़ना...