महात्मा का दिन - अहिंसा दिवस

जन्मदिन मुबारक हो तुम्हें महात्मा....स्कूली दिनों की बात करूँ तो हर रोज़ प्रार्थना प्राँगण में लगे ब्लैक बोर्ड पर सफेद चॉक से समाचार लिखने की ज़िम्मेदारी निभाते निभाते रोज़ सबसे ऊपर की पंक्ति में एक अनमोल वचन लिखने की भी परंपरा थी.....इस परंपरा को निभाते निभाते कब महात्मा से प्यार हो गया , नहीं जानता।.....बाल मन में तब कई सवाल भी उठा करते थे कि ये महात्मा कैसा था?.....देश को आज़ाद करवाया तो इतनी जल्दी क्यूँ चला गया? ...... आज़ादी की मुहिम का सूत्रधार था तो प्रधानमंत्री राष्ट्रपति क्यों नहीं बना?.....भगत सिंह की हिमायत क्यों नहीं की? .....बाकी सब नेता थे ये महात्मा क्यूँ था?.....और भी कई सवाल चक्करघिन्नी बन मन की दीवारों से टकराते रहते। प्रार्थना समाप्त होने तक ब्लैकबोर्ड पर अनमोल वचन और समाचार सुलेख में लिख देता ....मेरा साथी देवेंद्र बीच बीच में मुझे चॉक, डसटर या स्केल पकड़ाता रहता। हर साल 2 अक्टूबर पर बाल सभा होती और...... 'दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल' सरीखे गीतों में बीतती।.....मैं कभी महात्मा गाँधी पर निबंध पढ़ता कभी कोई किस्सा या कविता।..... यह सब एक रस्म की तरह चलता रहा सालोंसाल .... सालोंसाल परत दर परत महात्मा अंदर तक घर कर गया....जैसे सारे सवालों के जवाब दे गया। जो बचते हैं उनके जवाब किताबों में खोज लेता हूँ ।.....तुम्हारी आत्मकथा भी ये सिखाती है कि आत्मकथा लिखने के लिए भी हिम्मत चाहिए वरना अमुक इंसान फलां फलां तारीख़ को पैदा हुआ और फलां फलां स्कूल से पढ़ कर फलां फलां जगह पर रहा.... ऐसे तो हर कोई लिख ही दे। ...ईमानदारी , सत्य, अहिंसा में तुम्हारा कोई सानी अभी भी 150 साल में पैदा नहीं हुआ है।......तुम्हें नमन महात्मा .... और उस कोख को भी जिस से तुम जन्मे।.....मैंने स्केच बहुत बनाए हैं .....मगर आज पहली बार तूलिका से वास्ता पड़ा है...... पर लग रहा है इसमें से झाँक कर जैसे ‘महात्मा’ बोल रहे हों ....”बढ़े चलो प्रीत ! सफ़र लम्बा है ...पर कारवाँ यक़ीनन सुंदर होगा”.... हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया मेहरबान दोस्त Ashu का ....

#रंगों_से_मेरे_प्रयोग


#अहिंसा_जयंती_मुबारक़

DrGurpreet Singh

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