बठिंडा- छोले भटूरे वाला प्लैट्फ़ॉर्म
पंजाब के दक्षिण पश्चिम भाग में बसा शहर बठिंडा ......प्लैट्फ़ॉर्म पर उतरते ही जो तीन शख़्सियतें याद आयीं- गुरदयाल सिंह, बलवंत गार्गी और कुलदीप मानक.....तीनों ही नाम इस शहर से हैं और किसी परिचय के मोहताज नहीं।...इतिहास में जाऊँ तो पंजाब के पिछड़े मालवा प्रदेश में बसे इस शहर की अपनी अलग पहचान है ....प्लैट्फ़ॉर्म से ही शुरू करूँ तो यह २४ घंटे गरमागरम भटूरे छोले से आपका स्वागत करता है।वजह भी जायज़ सी है .... बठिंडा जंक्शन उत्तरी भारत के सबसे बड़े जंक्शन में से एक है ....यानी उत्तरी भारत की शायद ही ऐसी कोई रेलगाड़ी होगी जो यहाँ से हो कर ना गुज़रे।....मेरा ननिहाल मंडी डबवाली है इसलिए बठिंडा से सामीप्य के चलते इतना सब कह पा रहा हूँ। यहाँ का ‘क़िला मुबारक’ क़िला जो सम्राट कनिष्क की देन है, कालांतर में दिल्ली सल्तनत की मलिका ‘रज़िया सुल्ताना’ की जेल भी बना। इसके अलावा दो बड़े और आधुनिकतम थर्मल पावर प्लांट तो हैं ही।.....भारत का सबसे बड़ा छावनी क्षेत्र भी यहीं है जो एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी छावनियों में भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।......कहने को कृत्रिम झीलों के कारण इसे city of lakes कह देते हैं लेकिन रक दुखद सच्चाई बठिंडा के बारे में यह है कि यहाँ का पानी इतना प्रदूषित है कि उत्तरी भारत के सबसे ज़्यादा कैन्सर मरीज़ इसी प्रदेश से आते हैं।........बचपन से सुनता आ रहा हूँ फिर भी समझ नहीं आता कि इसे अतिशयोक्ति कहूँ या त्रासदी कि बठिंडा-बीकानेर एक्सप्रेस ट्रेन को ‘कैन्सर-ट्रेन’ के नाम से जाना जाता है।......ख़ैर भोले भाले लोग और पिछड़ा इलाक़ा होने के कारण बठिंडा के लोगों को तंज और चुटकुलों का शिकार भी होना पड़ा है.......लेकिन कालांतर में शिक्षा का अहम केंद्र बन गया है बठिंडा...एम्स भी खुलने वाला है।धोबी बाज़ार ख़रीददारी का मुख्य आकर्षण है।.......पार्किंग की व्यवस्था सुचारू है।इसलिए पैदल बाज़ार घूमने का मज़ा ही कुछ और है।...... बठिंडा इतना सब लिखवा देगा मुझसे सोचा नहीं था.....राजेंडरा कॉलेज में आज पुस्तक मेले का आख़िरी और व्यस्त दिन है इसलिए प्लैट्फ़ॉर्म पर उतरते ही सोचा कि आप सबको इस शहर से रूबरू करवाऊँ।........रिक्शा के बजाय शैदाई ने 3 किलोमीटर पैदल चलना ही मुनासिब समझा।..बाक़ी आपको जो ठीक लगे 🙂 🙂









Comments