शर्मनाक सिस्टम

दिसम्बर 2012 में 'दिल्ली सामूहिक बलात्कार प्रकरण' से व्यथित हो कर पहली बार लोग सड़कों पर आये थे....किसी लड़की के लिए.....यहाँ 'लड़की' शब्द पर जोर इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि ये मेरा देश 'भारतवर्ष' है जहाँ लड़की के नहीं लड़के के जन्म पर लड्डू बंटते है....थाली बजती है....ढोल पीटे जाते हैं....खुसरे-बाजीगर-छुरीमार बधाई लेने आते हैं। लड़के को जन्म देने वाली माँ की इज़्ज़त ससुराल में बढ़ जाती है.....पूरे मोहल्ले-रिश्तेदारी में गला-काट स्पर्धा में उत्तीर्ण जो हुई होती है। दूसरी ओर लड़की को जन्म से ही पनौती/बोझ/भार/जिम्मेदारी/बेगाना धन/पराई इत्यादि नामों से नवाज़ के अपने ही घर में पराया या यूं कहूँ द्वितीय दर्जे की नागरिकता दे दी जाती है।......ठीक ठाक पढ़ लिख जाए तो ठीक नहीं तो जबरन शादी करवा कर ताउम्र के लिए मनोबल तोड़ दिया जाता है।.....अगर वो पढ़ लिख कर खुद के पैरों पर खड़ी हो कमाने लग जाये तो या तो घर परिवार वाले उसके आगे पीछे रिरिया कर उस पर निर्भर हो जाते हैं या उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए हर सम्भव अपशब्द से नवाजते हैं।.....बात कर रहा था 2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार प्रकरण की। जब पहली बार मेरे देश के लोग किसी लड़की को न्याय दिलवाने के लिए सड़कों पर उतरे थे।....हालांकि इससे पहले जेसिका लाल प्रकरण हो या आरुषि हत्याकांड लड़कियों को मोमबत्तियां जला कर श्रद्धांजलि दी जाती रही है।.....अभी थोड़ा सोशल मीडिया आधुनिकता के चलते RIP लिखने का चलन बढ़ गया है।.....पिछले दिनों हैदराबाद की एक डॉक्टर लड़की का सामूहिक बलात्कार करके जिंदा जलाने की खबर पढ़ कर इतना व्यथित हुआ कि शब्द ही नहीं बचे मेरे पास।..... बलात्कार क्यूँ होते हैं , इस विषय पर बहुत सारा ज्ञान सोशल मीडिया पर मुफ्त में बांटा जा रहा है। कविताएं लिखी जा रही है....स्लोगन लिखे जा रहे.... मर्द जात को गालियां दी जा रही....लड़की की फ़ोटो पोस्ट करके खूब फाँसी फाँसी की जा रही।.... न्यूज़ चैनल वाले अपनी टी आर पी बढाने के चक्कर में फटाफट दोयम दर्जे के कैसे भी तथाकथित 'एक्सपर्ट/NGO/समाजसेवक/राजनेता/धर्मगुरु' बैठा कर पूरी चिल्ल पौं मचा रहे।....हर तरफ शोर मचा हुआ है।....चैनल बदलोगे तो नागिन, उल्टा चश्मा, रामायण, अशोका, बिग बॉस सब फुल स्पीड में वैसा ही चल रहा है। ..... यहाँ पर मैं वैसा कोई ज्ञान बाँटने नहीं आया कि सोच बदलो, लड़कों को सिखाओ, लड़कियों को मार्शल आर्ट सिखाओ, माइंड कंडीशनिंग, बॉडी नॉर्मलाईजेशन।....ये सब ज्ञान इधर उधर खूब पढ़ लोगे दोस्तो।.....मेरे ख्याल से ये मुद्दा राजनैतिक ना हो कर सांस्कृतिक और  सामाजिक तो है ही, बौद्धिक और तांत्रिक विश्लेषण का भी है।.......लड़ाई पावर /सत्ता की है सारी.......शोषक की शोषित पर किये शोषण की बात है सारी.....मन में ढेर सारे सवाल हैं......क्यों हमारे देश की न्यायपालिका,  व्यवस्थापिका और कार्यकारिणी को कटघरे में खड़ा नहीं करती।.....कानून बना है तो उसका पालन भी तो डंडे से करवाना जरूरी है ना?....सिर्फ 'कम्प्यूटर की खोज करना' या 'चांद पर जाना' 21वीं सदी का उद्देश्य नही था। क्या फायदा ऐसी टेक्नोलॉजी का जो हमें दूसरे देशों से लड़ने का तो आश्वासन देती है मगर देश की सरहदों के भीतर की सड़कों पर चल रही अकेली लड़की को सुरक्षा नहीं दे पा रही।..... हर लड़की कराटे/ मार्शल आर्ट नहीं सीख सकती क्योंकि हर इंसान के जीवन की अपनी अपनी परिस्थितियां और आर्थिक सीमाएं हैं। तो क्या प्रशासन या पुलिस, प्रौद्योगिकी क्षेत्र की मदद से इतना भी नहीं कर सकते कि कम से कम सार्वजनिक क्षेत्रों को सुरक्षा के प्रति आश्वस्त बना सकें।....."गलती इसकी थी ...गलती उसकी थी.... देर रात थी.... किसके साथ थी...फोन बंद था....हमारा कर्मक्षेत्र नहीं....दूसरे थाने में FIR करवाओ " ये सब फ़िज़ूल की बातों की बजाय हम सब सही दिशा में सहयोग के साथ कार्य कर सकें इसके लिए प्रतिबद्ध होना जरूरी है।.....जिन अंग्रेजों को हम इस देश को गुलाम करने के लिए कोसते हैं उनके वहाँ जा के देखो 'लॉ एंड आर्डर' क्या होता है। वहाँ सुधार गृह या जेलों की बजाय  टेक्नोलॉजी और 'लॉ एंड ऑर्डर' पर पैसा खर्च होता है।......वहाँ की सरकार सड़कें नहीं बनाती, स्कूल/कॉलेज बनाती है।.....मंदिर मस्जिदों की बजाय अस्पताल और मेडिकल फैसिलिटी पर पैसा खर्च करती है।......हमें सोचने की जरूरत है। दुष्यंत कुमार साहब चाहे पीर को पर्वत की संज्ञा दे गए लेकिन ‘सिलेबस’ फिर भी सारा का सारा पड़ा है अभी ........और ‘परीक्षा’ रोज़ हो रही है।.....फिलहाल खूब शोर है बाहर गाना बज रहा है..... 'बचना ऐ हसीनों लो मैं आ गया।'.......

#शर्मनाक_सिस्टम

#Shameful_Law_and_Order

Comments

Unknown said…
This comment has been removed by a blog administrator.

Popular posts from this blog

मैंटल आधुनिकीकरण

बिंदी वाली गुड़िया

कैटरपिलर/ बम्बई डायरी/ 10-09-2016