बरेली वाक़या- बर्बरता की मिसाल
ये तस्वीर कल उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है ,जहाँ पर तुग़लकी फ़रमान और लचर प्रबंध के चलते घरों को वापिस लौटे मज़दूरों और निचले तबके पर हुकूमत ने सोडियम हाइपोक्लोराइट नामक एक ज़हरीले रसायन का ज़बरन छिड़काव करवाया।
मुझे अपने मेडिकल स्कूल के दिनों की याद आ गई, जब केमिस्ट्री की प्रयोगशाला में हम इस रसायन से क्लोरीन गैस बनाया करते थे और हमारे अध्यापक हमें सावधानी से इसे इस्तेमाल करने की हिदायत देते थे।आपकी जानकारी के लिए साथ में विकिपीडिया का पेज साझा कर रहा हूँ। ये रसायन oxidizer होता है और मुख्यतः बहुत ज़्यादा गंदे पानी को साफ़ करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होता है। मेटल या मार्बल की सतह पर गिर जाए तो उसका क्षय कर देता है। यानि कि corrosive property होती है इसमें।.....आँखों में चला जाए तो आँखें हमेशा के लिए ख़त्म हो सकती हैं।.......ब्लीचिंग या कलीनिंग एजेंट के रूप में विख्यात इस केमिकल को कल कोरोना और लोकडाउन के चलते बरेली लौटे मज़दूरों और ग़रीब तबके को सरेआम सड़क बिठा कर फ़व्वारे की तरह उड़ेला गया।......ज़ुल्म, बर्बरता , हैवानियत और मर चुके ज़मीर के ज़ुल्म की इस से बड़ी मिसाल आज के दिनों में मिलनी मुश्किल ही है।....बाद में सोशल मीडिया पर इस बारे सवाल उठाए जाने पर सफ़ाई में ये कहा जा रहा है कि अति सक्रियता के चलते बसों की सफ़ाई में उपयोग किए जाने वाले रसायन को ही जल्दबाज़ी में लोगों पर उँड़ेल दिया गया।......हुकूमत को तो सौ लानतें हैं ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन और मानवाधिकार आयोग भी अगर इस विषय में कड़े क़दम नहीं उठाता तो ऐसी चमचागिरी करने वाली दुकानों को भी सौ लानतें हैं।....... समाज के सबसे निचले तबके पर किए गये ये ज़ुल्म इतिहास में काले अक्षरों में तो लिखे जा ही चुके हैं ...अगर ये घटना, ये तस्वीर, ये घटनाएँ आपके दिलों पर कोई असर नहीं करती तो सत्ता और न्यायपालिका के साथ साथ आप पर से भी उनका विश्वास उठ जाएगा।......
-Dr Gurpreet Singh


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