सादुलशहर वाले बच्चे
मेरी प्यारी छोटी बहन चितवन और बाकी के चचेरे भाई बहन। आज हालाँकि इनसे पहली बार मिलने का मौका मिला लेकिन दो मिनट में ही ऐसे घुल मिल गए मुझसे कि जैसे बरसों से साथ हों। कुछ रिश्तेदार ऐसे होते हैं ना जिनसे कभी मिलने का मौका नहीं मिल पाता लेकिन जब मिलते हैं तो लगता है कि पहले क्यों नहीं मिले। आज ऐसे ही दादी के चचेरे भाई मग्गर सिंह बाबा जी के घर सादुलशहर जाने का मौका मिला। मुझे बच्चों और बुजुर्गों से विशेष लगाव है। उनके और उनकी रुचियों के बारे में जानना मुझे बहुत अच्छा लगता है।.....छोटे बच्चों की बातें, उनका ज़िंदगी को देखने का नज़रिया और उनके सपने ये सब मुझे विशेष रूप से उनसे जोड़ते हैं। आज इन बच्चों के साथ कुछ समय बिता कर रूह को इतना सुकून मिला कि मैं बस निःशब्द सा इन्हें सुनता रहा और ये अधिकारपूर्वक बस अपनी अपनी बात कहते चले गए। कोई मेरे साथ बॉल खेला तो किसी ने मुझे मोबाईल पर वीडियो एडिट करनी बताई। मेरे जाते ही ये जो भी ताश वग़ैरह खेल रहे थे, एकदम से छोड़ कर मेरे पास आ कर बैठ गए। चितवन सबसे छोटी हो कर भी सब पर भारी पड़ रही थी, किसी को आगे नहीं आने दे रही थी। गुरमन को आर्ट एंड क्राफ्ट का शौक था उसने मुझे अपना कागज़ का बनाया हुआ हवाई जहाज भी दिखाया। मैंने उन्हें pinterest app के बारे में बताया तो इतनी फुर्ती से उन्होंने अपनी मम्मियों के मोबाईल फोनों में app इनस्टॉल कर ली और लगे मुझसे पूछने। ....थोड़ी देर बार चितवन एक कार्ड बोर्ड सा ले आई, मालूम चला कि कुछ समय पहले उनमें से किसी के जन्मदिन पर केक इस बोर्ड पर आया था तो ये उन्होंने फेंका नहीं। मेरे मुँह से निकल गया कि चलो इस पर कुछ रंग करते हैं तो बच्चे फ़टाफ़ट रंग उठा लाये और बोले कि " वीरजी इस पर डोरेमोन बना के देंगे हमें। " अंधा क्या चाहे दो आँखें, पेंटिंग का भूत तो वैसे भी चढ़ा ही रहता है मुझ पर। फिर पता चला कि पेंटिंग ब्रश तो है ही नहीं उनके घर पर, लेकिन बात तो आज बच्चों का मनोरंजन करवाने की थी, तो सोचा कि चलो हाथों पर रंग लगा कर पेंट किया जाए। सभी बच्चे लग गए मेरे साथ और अपने अपने हिसाब से जिस से जो हुआ, किया। लेकिन सच बताऊँ, आज बहुत सुकून मिला। शुक्रिया ज़िंदगी की इन नेमतों का। बहुत यादगार शाम आज की।
Dr Gurpreet Singh /ज़िंदगी की डायरी














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