गोबिंद - जनमानस की आवाज़



गोबिंद एक मज़हब विशेष के इतिहास का महज़ एक किरदार नहीं। ना ही पुजारी द्वारा स्थापित कोई धार्मिक महानायक ही है।

गोबिंद उस एक विचारधारा का नाम है जो ज़ालिम सत्ता की आँख में आँख डाल कर उसका ग़ुरूर भी तोड़ सकती है और वक़्त आने पर अपने पुत्रों की बलि भी दे सकती है। गोबिंद अपने पिता की बलि पर भी उत्साहित है और आमजन के अधिकारों की ख़ातिर ताली बजा कर आनंदपुर का क़िला छोड़ते हुए अपने रण कौशल और पाक इरादों का परिचय भी देता है।

गोबिंद उस सच्चाई का नाम है, जो झूठ के अँधियारे को चीरती हुई इतिहास के सफ़हों पर दर्ज है। गोबिंद हर उस आम इंसान की आवाज़ है जो मारी जा सकती है लेकिन दबाई नहीं जा सकती। 

प्यारा गोबिंद ख़ुद को भगवान इसीलिए ही नहीं कहता क्यूँकि वो हर उस आम इंसान की परछाई है जो सच के रास्ते पर चलता है, जिसे बस इंसानियत में छिपी सच्ची नीयत सीख कर ज़िंदगी जीनी है। यही बात उसे विरला और सम्पूर्ण बनाती है।

DrGurpreet Singh

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