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Showing posts from February, 2021

जस्टिस प्रतिभा रानी

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  निर्भया सामूहिक बलात्कार प्रकरण में फाँसी की सज़ा सुनाने वाली मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रतिभा रानी एवं उनके पति के साथ तीन दिन तक मुझे उनके प्रोटोकौल ओफिसर के रूप में रहने का जो मौक़ा मिला था वो ताउम्र एक सुंदर अनुभव के रूप में दर्ज रहेगा। बात 2018 के शुरुआती दिनों की है। मैं तब अमृतसर में इंटेलिजेन्स ओफिसर के पद पर तैनात था और एक समग्लर को अमृतसर एयरपोर्ट पर गिरफ़्तार किया था। चूँकि आरोपी क़ानूनी भाषा में Habitual Offender था तो अपराध की गम्भीरता को देखते हुए ‘कोफ़ेपोसा’ लगाने की क़वायद चल रही थी। कोफ़ेपोसा भी क़ानूनी भाषा का शब्द है जिसे आम भाषा में कहूँ तो यह एक ऐसा कड़ा क़ानून (एक्ट) है कि जिस व्यक्ति पर अगर ‘कोफ़ेपोसा’ लग जाए तो उसे किसी भी सूरत में एक साल तक ज़मानत नहीं मिल सकती।  इसी प्रकरण के सिलसिले में दिल्ली हाईकोर्ट से एक बेंच अमृतसर आनी थी। जिसकी अगुवाई जस्टिस प्रतिभा रानी मैडम कर रही थी और तक़दीर को शायद यही मंज़ूर था कि मैडम के प्रोटोकोल ओफिसरके तौर पर मुझे चुना गया। तीन दिन तक संयुक्त सचिव श्रीमान बतरा एवं जस्टिस मैडम के साथ मुझे रहना था। आख़िरी दिन मैडम और उन...

आगरा वाली आशु - इक मनचाहा रिश्ता

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  साल 2019... और ज़िंदगी के कैलेंडर पर तवारीख थी 28 जून। जब फ़ेसबुक की असहज दुनिया में सहजता से मेरा मित्र आवेदन स्वीकार हुआ था  सामने शख्स भी बहुत खास .... Ashu Chaudhary और शायद रूह की वाबस्तगी ही थी कि लगा ही नहीं कि हम फ़ेस्बुक पर ही मिले।   प्यारी दुलारी दोस्त जितनी ज़हीन चित्रकार और कलाप्रेमी है उतनी ही सहज और सुलझी हुई इंसान भी। ये आशु ही है जो बड़ी बेबाकी से कहती है   "आत्मीयता अंतरंगता में न बदले तो संबंध दीर्घजीवी होते हैं। ऐसा मेरा मानना है । इसका दायित्व दोनों पर होता है दोस्त।..... ये साफगोई शुरू में अटपटी ज़रूर लगती है लेकिन ये बहुत मजबूत नींव है दोस्ती की" और इस शैदाई ने उसी रौ में कह दिया था "आपकी परिपक्वता की क़द्र करता हूँ ...साफ़गोई मुझे भी पसंद है" वो बड़प्पन नहीं बराबरी चाहती है इसीलिए दोस्ती में जी हुजूरी से परहेज़ भी खाती है। .... बेबाकी से कह देती है....आप मुझे आशु या अर्शी बोल सकते हैं...हम दोस्त हैं बड़े या छोटे नहीं....विचारों की उम्र दोस्ती के लिए काफ़ी होती है दोस्त.... और फिर एक दिन लोकल ट्रेन में सफर करते हुए अपने कुछ स्केचेज़ इन्ह...

मैं नामी क़लम और वो बेनामी स्याही

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  वो जानती है कि मुझे गिफ़्ट लेना नहीं,देना पसंद है।....लेकिन वो ये भी जानती है कि मुझे लिखना बहुत पसंद है....वो नहीं जानती कि मेरे लिखे को वो कभी समझ पाएगी या नहीं....बस इसीलिए लेखन की कोई सुंदर सी नेमत बन मेरी अंगुलियों में हमेशा धड़कना चाहती है।....इसीलिए मेरा ही नाम लिखवा पेन भिजवा दिया उसने....और ख़ुद को बड़ी मासूमियत से मेरे अक्षरों में अमर करवा लिया। #Promise_Day #Gifted_Pen