मैं नामी क़लम और वो बेनामी स्याही

 

वो जानती है कि मुझे गिफ़्ट लेना नहीं,देना पसंद है।....लेकिन वो ये भी जानती है कि मुझे लिखना बहुत पसंद है....वो नहीं जानती कि मेरे लिखे को वो कभी समझ पाएगी या नहीं....बस इसीलिए लेखन की कोई सुंदर सी नेमत बन मेरी अंगुलियों में हमेशा धड़कना चाहती है।....इसीलिए मेरा ही नाम लिखवा पेन भिजवा दिया उसने....और ख़ुद को बड़ी मासूमियत से मेरे अक्षरों में अमर करवा लिया।


#Promise_Day #Gifted_Pen


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