जस्टिस प्रतिभा रानी
निर्भया सामूहिक बलात्कार प्रकरण में फाँसी की सज़ा सुनाने वाली मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रतिभा रानी एवं उनके पति के साथ तीन दिन तक मुझे उनके प्रोटोकौल ओफिसर के रूप में रहने का जो मौक़ा मिला था वो ताउम्र एक सुंदर अनुभव के रूप में दर्ज रहेगा।
बात 2018 के शुरुआती दिनों की है। मैं तब अमृतसर में इंटेलिजेन्स ओफिसर के पद पर तैनात था और एक समग्लर को अमृतसर एयरपोर्ट पर गिरफ़्तार किया था। चूँकि आरोपी क़ानूनी भाषा में Habitual Offender था तो अपराध की गम्भीरता को देखते हुए ‘कोफ़ेपोसा’ लगाने की क़वायद चल रही थी। कोफ़ेपोसा भी क़ानूनी भाषा का शब्द है जिसे आम भाषा में कहूँ तो यह एक ऐसा कड़ा क़ानून (एक्ट) है कि जिस व्यक्ति पर अगर ‘कोफ़ेपोसा’ लग जाए तो उसे किसी भी सूरत में एक साल तक ज़मानत नहीं मिल सकती।
इसी प्रकरण के सिलसिले में दिल्ली हाईकोर्ट से एक बेंच अमृतसर आनी थी। जिसकी अगुवाई जस्टिस प्रतिभा रानी मैडम कर रही थी और तक़दीर को शायद यही मंज़ूर था कि मैडम के प्रोटोकोल ओफिसरके तौर पर मुझे चुना गया। तीन दिन तक संयुक्त सचिव श्रीमान बतरा एवं जस्टिस मैडम के साथ मुझे रहना था। आख़िरी दिन मैडम और उनके पति को अमृतसर बाज़ार और वाघा बोर्डर भी घुमाने ले कर गया। मैडम के साथ रह कर कभी लगा ही नहीं कि उनमें बड़े ओहदे का कोई घमंड या दिखावा है। बाज़ार में चलते हुए मैंने पूछा “मेम आप पैदल चल लेंगे ? क्यूँकि गलियाँ संकरी होने की वजह से गाड़ी आगे नहीं जा पाएगी “.....तो बड़ी सादगी से हँस दी और बोली “चलो।”....फिर बाज़ार में मसाले और बड़ीयां ख़रीदते हुए भी मुझसे सलाह ले लेती थी। ........वैसे बोलती बहुत कम हैं लेकिन जब भी बोलती हैं एक आत्मीयता का अहसास कराती हैं।....कभी कभी कुछ कहते हुए झिझक भी जाती हैं...और सबसे बड़ी बात वाघा बोर्डर पर इन्हें flag ceremony दिखाते हुए साथ बैठा “मेम वो देखो ...वो देखो !! “ कहता मैं भूल जाता था कि किसी मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठा हूँ।
कभी कभी सोचता हूँ सौम्य और सरल स्वभाव वाली जस्टिस प्रतिभा रानी जी को देख कर कौन कह सकेगा कि निर्भया कांड जैसे जघन्य आपराधिक मामले में आपने टस से मस हुए बिना ना केवल सभी कोर्ट ट्रायल को सुचारू रूप से बिना किसी अवकाश के संचालित किया बल्कि अपनी समझ बूझ का परिचय भी दिया।आपके साथ बिताया समय मेरी चेतना रहने तक मन मस्तिष्क में सहेजा रहेगा मेम।🙏🏻
DrGurpreet Singh

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