कहीं ना पहुँच सकने वाले रास्ते

 

 

 

तुम जाने की बात कर रही हो?

- मैं आई ही कब थी?.... और जिस दिन जाना होगा ना तुम्हें पता भी नहीं चलेगा....

-हम्म..... सुनो

-हम्म.... बोलो

-कुछ नहीं।

-बोल दीजिये।

-.......कुछ नहीं।

-मेरे साथ चलोगी??

-मेरे साथ आपका कोई रास्ता नहीं है.... ठीक है?....तो ऐसी बात किया ना करो जो पॉसिबल ना हो.....

उसकी यह बात सुन उसे भी इस बात का एहसास हुआ कि उसके साथ वो चल सकता है....लेकिन कहीं पहुंच नहीं सकता......लेकिन अगले ही पल उसका मन हुआ कि उसे कह दे ......कि मुझे तुम्हारे साथ किसी रास्ते की जरूरत नहीं पड़ेगी.....न कहीं पहुंचने की जरूरत पड़ेगी।..... तुम्हें मिलना ही मेरे लिए मंजिल पहुंचने जैसा है....मैं चाहे तुम्हारा चाँद नहीं, लेकिन तुम ही मेरा मुकम्मल आसमां हो.....जहाँ से हम चलेंगे नहीं,...सिर्फ उड़ेंगे।......उसे लगा उसके सारे नादां सपने उस पर अट्टहास कर रहे हैं......और उसके आस पास की हवा कसैली हो उसका दम घोंट रही है।

-क्या सोच रहे हो??

-कुछ नहीं

-अपना ख्याल रखना

-ह्म्म्म....    आप भी अ प ना...

शब्द जैसे उसके गले में कहीं अटक गए।

DrGurpreet Singh #प्रेम_के_वो_दिन



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