जॉन कीट्स और भगत सिंह
महबूब कवि है जॉन कीट्स। 25 की उम्र में इतना प्यार कमा गया जितना भगत सिंह 23 की उम्र में कमा कर गया। मुझे कभी कभी लगता है भगत सिंह अगर क्रांतिकारी और नास्तिक न हो कर एक रूमानी कवि होता तो वो बिल्कुल जॉन कीट्स जैसा ही होता। भगत सिंह की ख्याति दबाने के लिए उसे फांसी दी गयी।
कीट्स जब मृत्यु शैय्या पर थे तब उनकी कविताएं किताबी रूप में छपने के लिए प्रकाशक प्रेस में गयी हुई थी और मृत्योपरांत उन्हें सम्मान मिला।
जब 25 साल में ट्यूबरक्लोसिस से बहुत बीमार हुए तो
डॉक्टरों ने इटली जाकर रहने की सलाह दी
ताकि गर्म मौसम कुछ मददगार हो सके
अलविदा कहते समय कीट्स को पता था वो अपनी beloved फैनी से कभी नही मिल पाएंगे
उन्होंने अपने दोस्त से कहा, ‘अभी-अभी तो जीना शुरू किया था। अंदाजा नहीं था कि मौत इतनी जल्दी आ जाएगी
जब मैं मरूं तो मेरी कब्र पर लिखवाना: ‘यहां वह आदमी सोया है, ईश्वर ने जिसका नाम पानी पर लिखा था...
रोम पहुंचने के कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई,
उनके दोस्त के आखिरी शब्द थे वो पक्षी उड़ना भूल गया जो खुले आसमान में उड़ता था...
~DrGurpreet Singh
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