अमृता प्रीतम - मुहब्बत की मस्जिद
आज सबसे खूबसूरत नज़्म (जिसे मैंने सबसे पहले जीया) अमृता प्रीतम का 100वाँ जन्मदिन है। जन्मदिन मुबारक हो अमृता! जिसने अमृता को पढ़ा है वो ही समझ सकते हैं कि वो क्या है.... इमरोज़ के शब्दों में "उसने मुहब्बत लिखी नहीं उसे जीया।".... उसने बस मुहब्बत की।.... अमृता ने साबित कर दिया कि मुहब्बत को लिखा नहीं जाता उसे पहले जीया जाता है।..... उसे नस नस में नसवार के धुएं की तरह उतारा जा सकता है, ........सिगरेट की तरह पीया जा सकता है,...... लहूलुहान अंगलियों के पोरों से बगैर कागज़ - कलम दिल के पत्थरों पर लिखा जा सकता है...... उसे गीत की शक्ल दे कर, किसी अकेली रात आसमां का सीना फाड़ा जा सकता है।...... अपने गीतों की नायिका भी वो ही है और खाविंद भी।..... मुहब्बत की मुंसिफ भी वो ही है और खुद की सौतन भी वो ही..... वो काल मुक्त है क्योंकि वो अजरता अमरता से परे .... अमृत की तासीर है।...... वो गुल नहीं जो कभी मुरझा जाए वो गुलबत्ती है , वो गाँजे की कली है, वो अगरबत्ती का धुआं नहीं उसका नशा है।....... मिसाल के तौर पर जिस दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हिंदुस्तान की तक़सीम के बाद महज़ अपने कुछ फूहड़ तकनीक...