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Showing posts from August, 2019

अमृता प्रीतम - मुहब्बत की मस्जिद

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आज सबसे खूबसूरत नज़्म (जिसे मैंने सबसे पहले जीया) अमृता प्रीतम का 100वाँ जन्मदिन है। जन्मदिन मुबारक हो अमृता! जिसने अमृता को पढ़ा है वो ही समझ सकते हैं कि वो क्या है.... इमरोज़ के शब्दों में "उसने मुहब्बत लिखी नहीं उसे जीया।".... उसने बस मुहब्बत की।.... अमृता ने साबित कर दिया कि मुहब्बत को लिखा नहीं जाता उसे पहले जीया जाता है।..... उसे नस नस में नसवार के धुएं की तरह उतारा जा सकता है, ........सिगरेट की तरह पीया जा सकता है,...... लहूलुहान अंगलियों के पोरों से बगैर कागज़ - कलम दिल के पत्थरों पर लिखा जा सकता है...... उसे गीत की शक्ल दे कर, किसी अकेली रात आसमां का सीना फाड़ा जा सकता है।...... अपने गीतों की नायिका भी वो ही है और खाविंद भी।..... मुहब्बत की मुंसिफ भी वो ही है और खुद की सौतन भी वो ही..... वो काल मुक्त है क्योंकि वो अजरता अमरता से परे .... अमृत की तासीर है।...... वो गुल नहीं जो कभी मुरझा जाए वो गुलबत्ती है , वो गाँजे की कली है, वो अगरबत्ती का धुआं नहीं उसका नशा है।....... मिसाल के तौर पर जिस दिल्ली यूनिवर्सिटी ने हिंदुस्तान की तक़सीम के बाद महज़ अपने कुछ फूहड़ तकनीक...

समंदर सा बड़ा भाई

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बड़े भाई ! उस दिन तुम्हें देश ,तुम्हारी ज़मीं पर अटलांटिक महासागर को निहारते लगा था तुम भी उस समंदर से हो ....पाक, निर्मल, अथाह, असीम और अपरिमित प्रेम से ओत प्रोत। लेकिन तुम्हारी तुलना प्रशान्त महासागर से करूँगा क्योंकि तुम्हारे दिल में सिर्फ मेरे ही नहीं अपितु सभी के लिए निश्चल और असीम प्रेम भरा हुआ है।.......सच में तुम मेरे प्रशांत महासागर हो भाई! और मैं अटलांटिक सरीखे किसी चँचल महासागर सा हूँ। जिस में संवेदना, रूदन, विरह सरीखे कई भावों का व्यस्त यातायात है। ........तुम और मैं ध्रुव जैसी किसी ठंडी जगह पर दोनों हाथों से एक दूसरे को कस कर गले लगाना चाहते हैं .....लेकिन वो तो ध्रुव हैं ना..... हमारी बाजूएँ निशक्त पड़ जम जाती हैं ..... हम तड़पते हैं ,अपनी अपनी तकदीर को निहारते हैरां परेशा खुद को ही गले लगाने के लिए लौट आते हैं अपने अपने किनारों , अपनी अपनी हदों से..... और सोचते हैं क्या है हमारे दरम्यां ये समय का निष्प्राण टापू , .....कोई संवेदनहीन धरती.....सुना है कुछ लोग ,कुछ गाड़ियाँ रोज़ इस पर दौड़ती हैं....  काश कि हम इसे चीर गले मिल सकते।..... मेरे प्रशान्त ! सुना है इस ज़ाल...

अमिया कुँवर जी के साथ पहली मुलाक़ात

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तारीख 10 अगस्त 2019, ....शहर दिल्ली, घड़ी की सुईयां 10 बजकर 34 मिनट का इशारा कर रहीं थी। Amia Kunwar जी को फ़ोन किया कि आपके शहर दिल्ली में हूँ और ग्रीन पार्क रुका हुआ हूँ, उधर से आवाज़ आई -''फौरन घर आ जाओ"....फिर कुछ रुक कर बोली....''ड्राइवर भेज रही हूँ , अभी तुम्हें फ़ोन करेगा''....मैंने कहा ''अच्छा''.......हालांकि एक दिन पहले बम्बई से चलने से पहले भी बताया था कि कल दिल्ली से हो कर गुजरूँगा।........ ज्ञात हो कि बचपन से ही अमृता प्रीतम का मुरीद रहा हूँ और कालांतर में इमरोज़ जी के साथ मुलाकातों का सिलसिला रहा है .....लेकिन अमृता को ना मिल पाने का दर्द हमेशा दिल के हर इक कोने में इक आम से प्रशंसक से कहीं ज्यादा जज़्ब है।........ ख़ैर कुछ साल पहले यू ट्यूब पर देखा सुना था कि अमृता इमरोज़ के आशियाने K-25, Hauz Khas को परिस्थितिवश तोड़ दिया गया है और इमरोज़ ग्रेटर कैलाश में रहने चले गए हैं।.....उस वीडियो को मैंने कई बार देखा सुना और बारम्बार रोया....अमृता को ना मिलने का दुःख अब उसके आशियाने तक को भी ना देख पाने के दुःख के साथ जा मिला था.....वीड...

मेरी बहन मीनू और उसका नोनू

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बात बचपन की है और बेहद दिलचस्प है। मेरी बड़ी बहन मीनू और मुझमें दो साल का फ़ासला है।नीचे दी गई एक तस्वीर मेरे जन्म से पहले की है जिसमें मीनू के हाथ में एक खिलौना है। ये गुडडा जब घर आया तो मीनू हर समय इसको अपने साथ रखती। उठते बैठते , खाना खाते , अपना छोटा सा स्कूटर चलाते या सोते हुए भी यह खिलौना उसकी गोद में या बग़ल में रहता। ननिहाल जाती तो भी बैग में रखवाती......शिद्दत की इंतहा ये थी कि मीनू ने इसका नामकरण भी कर दिया था- ‘’नोनू’’..... सारा दिन अपने नोनू से तोतली ज़बान में बातें करती उसका हाल चाल पूछती, उसे बुखार होता तो झूठ मूठ की दवाई पिलाती .....कभी ख़ुद रूठ जाती कभी उसे मनाती ......कहने का मतलब नोनू अब मीनू की दुनिया था और वो अपनी इस दुनिया में इतनी ख़ुश थी कि घर में दादा दादी मम्मी पापा चाचा ताऊ सब उसका और मूक नोनू का काल्पनिक संवाद सुनते और ख़ूब मज़े ले कर हँसते। दादी पूछा करती “अज्ज तेरे नोनू ने की खाना ?”.....”नोनू नहा लया?” .......”नोनू ने कपड़े नहीं बदले?”......जवाब मीनू के पास चटपट तैयार होते।.....कभी कभी दादी झुंझला कर पूछ बैठती “तैनूँ चकिए या तेरे नोनू नू ?”(तुझे उठाऊँ या ...

अंबाला कैंट में ओर्गानिक सब्ज़ी

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आज अंबाला कैंट क्षेत्र में घूमते हुए इस नेक दिल इंसान से रूबरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। .......आप भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं और हरियाणा स्टेट आबकारी कार्यालय से कुछ ज़मीन लीज़ पर ले कर बिना रसायन और कीटनाशकों की मदद से साग सब्ज़ियाँ उगाते हैं।......यानि कि सब्ज़ी बिलकुल ऑर्गैनिक और ताज़ी ....वो भी बाज़ार से कम दाम में। हमारे जाते ही इन्होंने दौड़ कर सलाम किया और थोड़ा सा सब्ज़ी सम्बंधित पूछने भर से जैसे हुक्म बजाने दौड़ पड़े और आनन फ़ानन कुछ सब्ज़ियाँ खेत में से तोड़ लाए ..... आजकल की दुनिया में महँगी दुकानों पर शुद्ध सामान की गारंटी नहीं मिलती ....वहीं एक ओर संसाधन विहीन यह नेकदिल इंसान बिना किसी मुनाफ़े के स्वास्थ्य बाँट रहा हो तो तस्वीरें साझा करना और पोस्ट लिखना तो बनता ही था ना ??? .....अंबाला कैंट में हो तो ज़रूर जाइए और ख़रीद कर लाइए। (नोट- तस्वीरों में दिखाई गई भिंडी और तुरई मेरे सामने ही खेत में से तोड़ी गई है) #Ambala_Diaries /13.Aug.2019

माँ का जन्मदिन

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Happy Bday Maa....May You Live the Longest. ਸ਼ੀਸ਼ੇ ਤੇ ਲੱਗੀ ਗੋਲ ਬਿੰਦੀ ਵਰਗੀ ਮਾਂ। ਮੇਰੇ ਚੇਹਰੇ ਦਾ ਨੂਰ ਮੇਰੀ ਪੱਗ ਦੀ ਚੜ੍ਹਤ ਮਾਂ। ਤੇਰਾ ਪਿਆਰ ਸਬਤੋਂ ਮਿੱਠੜਾ ਸਬਤੋ ਪਾਕ, ਤੂੰ ਜਦ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਹੁੰਨੀ ਹੈਂ ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਆਪਣਾ ਆਪ ਆਪਣਾ ਜਿਹਾ ਲਗਦਾ ਹੈ। ਤੇਰੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਚ ਵੇਖਦਿਆਂ ਮੈਨੂੰ ਸਾਰਾ ਜਹਾਨ ਆਪਣਾ ਜਿਹਾ ਲਗਦਾ ਹੈ। ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਹੋਣ ਤੇ ਯਕੀਨ ਜਿਹਾ ਵਧਦਾ ਹੈ। ਸਿਖ਼ਰ ਦੁਪਹਿਰੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਤਾਰਿਆਂ ਹੇਠ ਗੁਜ਼ਾਰੀ ਰਾਤ ਤੇਰਾ ਤੱਸਵੁਰ ਦਿਲ ਨੂੰ ਸੁਕੂਨ ਦਿੰਦਾ ਹੈ। ਤੇਰਾ ਹੋਣਾ ਜਿਵੇਂ ਖੁਦਾਈ ਦਾ ਮਿਲਣਾ, ਤੇਰਾ ਪਿਆਰ ਜਿਵੇਂ ਕੁਬੇਰ ਦੀ ਦੌਲਤ , ਤੇਰੇ ਬਲਿਦਾਨ ਜਿਵੇਂ ਮੇਰੀਆਂ ਕਾਮਯਾਬੀਆਂ ਦੀ ਪਤਵਾਰ। ਤੇਰਾ ਨੂਰ .......ਮੇਰੀ ਹਿੱਮਤ ਤੇਰੀ ਖਣਕਦੀ ਹੱਸੀ  ...ਤੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਬੋਲ  ...... ਤੇਰੀਆਂ ਮਿੱਠੀਆਂ ਝਿੜਕਾਂ ......ਤੇਰਾ ਸਾਥ  .....ਤੇਰੀ ਸੋਚ ...... ਤੇਰੀਆਂ ਚੂਰੀਆਂ ......ਤੇਰੀ ਨਿੱਘੀ  ਜੱਫੀ .....ਤੇਰੀ ਖੁਸ਼ਬੂ  .....ਤੇਰੀਆਂ ਚੂੜੀਆਂ.....ਤੇਰੀ ਬਿੰਦੀ......ਤੇਰਾ ਵਜ਼ੂਦ  .....ਸਬ ਕੁੱਜ ਦੁਨੀਆਂ ਰਹਿਣ ਤੱਕ ਸਲਾਮਤ ਰਹੇ ਮਾਂ। ~Preet