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Showing posts from March, 2020

बरेली वाक़या- बर्बरता की मिसाल

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ये तस्वीर कल उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की है ,जहाँ पर तुग़लकी फ़रमान और लचर प्रबंध के चलते घरों को वापिस लौटे मज़दूरों और निचले तबके पर हुकूमत ने सोडियम हाइपोक्लोराइट नामक एक ज़हरीले रसायन का ज़बरन छिड़काव करवाया। मुझे अपने मेडिकल स्कूल के दिनों की याद आ गई, जब केमिस्ट्री की प्रयोगशाला में हम इस रसायन से क्लोरीन गैस बनाया करते थे और हमारे अध्यापक हमें सावधानी से इसे इस्तेमाल करने की हिदायत देते थे।आपकी जानकारी के लिए साथ में विकिपीडिया का पेज साझा कर रहा हूँ। ये रसायन oxidizer होता है और मुख्यतः बहुत ज़्यादा गंदे पानी को साफ़ करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होता है। मेटल या मार्बल की सतह पर गिर जाए तो उसका क्षय कर देता है। यानि कि corrosive property होती है इसमें।.....आँखों में चला जाए तो आँखें हमेशा के लिए ख़त्म हो सकती हैं।.......ब्लीचिंग या कलीनिंग एजेंट के रूप में विख्यात इस केमिकल को कल कोरोना और लोकडाउन के चलते बरेली लौटे मज़दूरों और ग़रीब तबके को सरेआम सड़क बिठा कर फ़व्वारे की तरह उड़ेला गया।......ज़ुल्म, बर्बरता , हैवानियत और मर चुके ज़मीर के ज़ुल्म की इस से बड़ी मिसाल आ...

21 days Lock Down

जब व्यस्त होते हैं तब बहुत कुछ आता है मन में कि फुर्सत हो तो ये करेंगे वो करेंगे और उस दौरान बहुत कुछ एक्स्ट्रा करने की कोशिश भी करते हैं।......और अब जब पता है कि 21 दिन बहुत लंबा समय है बहुत कुछ किया जा सकता है तो कुछ भी करने का मन नहीं।....मेरी स्केच बुक और डायरियां भी बम्बई रह गयी।...घर पर हालांकि एक दर्जन बिना पढ़ी किताबें अलमारी में पड़ी हैं लेकिन कुछ मन नहीं कर रहा।....कुछ एक क्षणिकाएँ भी लिखने को पड़ी हैं लेकिन क्या पता लिखी जायेंगी या नहीं..... star maker पर भी बहुत दिन से कुछेक गीत गाने के बाद समय की किल्लत होने के कारण कोई गीत नहीं गाया।.. Yourquote भाई साब भी रोज़ नोटिफिकेशन भेज रहे हैं कि कुछ तो लिख दो बंधु।.......पुलिस की गाड़ियाँ सुबह शाम बाहर से गुजरती हैं।.... चारों ओर इराक के युद्ध सरीखी शांति पसरी है.... इक्का दुक्का दुपहिया वाहन जब इस शांति को तोड़ते हैं तो हैरान हुए बिना नहीं रहा जाता। लगता है जैसे धरती सूरज के चक्कर लगाना भूल गई हो और चंद्रमा डर के मारे किसी बिल में घुस गया हो।....अब अखबार भी घर पर नहीं आता। बस घर वाले आपस में मिल जुल कर बैठते हैं और खाना खा कर जै...

सहमा सा मेरा शहर- 22 मार्च 2020

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अभी स्टेशन से उतरा तो 2017 के मेरे श्रीनगर के दिन याद हो आए। जब हेड हवलदार क़ुरैशी के साथ सदर कोर्ट रोड से लाल चौक जाते हुए मैं बंद हुई दुकानों और सड़कों को देख हैरान हुआ पूछ बैठता था .....”क़ुरैशी आज भी कर्फ़्यू लग गया क्या? “.... तो वो खिसिया निपोरे कह देता ...”सर ! कर्फ़्यू लगे ना लगे आपाँ नू की फ़र्क़ पेंदा ?? और सुबह सुबह संतूर होटेल में आ कर जब वो ज़िद करता कि चलो घूम कर आते हैं सर.... तो मैं मज़ाक़ में कह देता कि मेरे लिए शलवार ले कर आओ फिर चलूँगा.... 😂....और किसी शाम बादशाह ब्रिज पर से होते हुए जब निकलते तो क़ुरैशी कहता “ सर कुछ दिन पहले आर्मी की गाड़ी उड़ाई थी इस ब्रिज पर से” .....और मैं सिहर उठता तो वो बच्चों की तरह खिलखिला कर हँस देता ....तब उसका चेहरा लाल गोश्त जैसा लगता।.....वही गोश्त जो डल झील के पास शाम को टहलते हुए उसका खाने का मन होता ,पर चूँकि मैं नहीं खाता तो वो भी नहीं खाता.....बस बच्चों की तरह देखता रहता......फिर किसी शाम गुरुद्वारा सिंह सभा के पास से गुज़रते हुए वो कहता कि “चलो सर ! गुरुद्वारा छटी साहिब चलें ...” तो मैं कहता कि ये सिंह सभा है छटी पातशाही दूसर...

नाम को सार्थक करती शख़्सियत- डॉ. सागर

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शुक्रिया Geeta इतने ज़िंदादिल इंसान से मिलवाने के लिए।.... आप उत्तर प्रदेश के बलिया से आते हैं , जेएनयू से पी.एच.डी. हैं और हिंदी सिनेमा में गीत लिखते हैं।...... इतना सब काफ़ी ही था इस शैदाई का आप पर मंत्रमुग्ध होने को।आपने भी उतनी ही गर्मजोशी से इस ख़ाकसार का स्वागत किया।.....वरसोवा स्थित आपके निवास स्थान पर कल 09 मार्च की दोपहर का समय कैसे बीता ,पता ही नहीं चला। बातचीत में आपकी भागीदारी ,बराबरी और मशगूलता के जिस स्तर पर होती है , कहना मुश्किल है कि पहली बार मिले। .......बात इतने इत्मिनान से सुनते कि बीच बीच में मेरे हास्य पर बड़े भाई की तरह खिलखिला कर हँस देते।..... हज़ारों साल जीती बसती रहें ऐसी जीवट शख़्सियतें, जिनके पदचिन्ह कामयाबी की राह में मील प्रस्तर से हैं और प्रकाश पुंज से आने वाली पीढ़ियों की राहों को आलोकित करेंगे। DrGurpreet Singh/ बम्बई डायरी/ 09.03.2020