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Showing posts from July, 2019

‘Raina’ - परिवार की शान

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आज मेरी बड़ी भतीजी Raina  (रवनीत कौर) का १२ वाँ जन्मदिन है ....अमेरिका के बॉस्टन में बड़े भाई का परिवार रहता है और ये बच्चा हमारे घर की इस पीढ़ी में सबसे बड़ा है ....ये सब तस्वीरें पिछले साल की मेरी अमेरिका यात्रा की हैं। स्वभाव से सयानी और नटखटी दोनों भाव रखने वाली प्यारी बच्ची का अपने चाचा से इतना स्नेह है कि स्कूल के अलावा पूरा समय मेरे साथ ही बिताती थी ....यहाँ तक कि स्वीमिंग क्लास और piano क्लास के समय भी मुझे साथ रखती ....वहाँ के बच्चों को advance maths की शक्ल में russian maths की classes में भेजा जाता है ....रैना के नटखटी और फितूरी दिमाग़ में russian maths बिठाना बड़ी बात थी ....फलस्वरूप घर पर मैं इसे पढ़ाया करता....और भारतीय शिक्षा प्रणाली की तरह वहाँ पर काग़ज़ काले करने का रिवाज नहीं , इसलिए उसके लैप्टॉप पर ही हम दोनों सवालों को बैठ किया करते ....जैसे ही किसी मुश्किल सवाल का जवाब मैं सही निकाल देता तो रैना हैरानी और ख़ुशी से मुझ पर कूद पड़ती।....अगले ४-५ दिन का गृहकार्य हम एक साथ ही निपटा देते .....और रोज़ जब उसकी russian maths की क्लास होती तो भी वो मुझे रोज़ अपने साथ ल...

बात उस शाम की......

दो मुख़्तलिफ़ अजनबी रास्ते उस शाम बस यूँ ही ना जाने क्यूँ कहीं मिल गए। और 'नसीब' ने संज़ीदगी से कभी 'मुहब्बत' के मरहम भरे, तो कभी आँख बचा चुपके से 'ज़िंदगी' के पाँव छूए। मगर अहसासों के चश्मे से झाँकती ज़िंदगी, उसकी नादानियों पर इठलाने के बजाय झुँझला उठी। शाम का एक एक कतरा उसके फुसफुसाने से जुगनुओं की मानिंद जगमगा उठा। और दूर तलक पैरों तले वो दो अजनबी रास्ते साथ साथ यूँ चले..... जैसे मुहब्बत के ज़ुर्म में कुछ बेक़सूर अक्षर चुपचाप फ़ना हुए हों। ©®प्रीत/21-07-2019/बम्बई डायरी

अंदर का तूफ़ान - अंतस की बेताबियाँ

कल ही की तो बात है , ऑफ़िस में एक जूनियर कर्मचारी मुझे गुडमॉर्निंग विश करके पास से गुज़र रहा था तो बोल उठा ....”सर आपको देख कर दिन बन जाता है ...” इस अप्रत्याशित टिप्पणी के जवाब में विस्मित सा मैं रुक गया। “क्यूँ भई ऐसा क्या हो गया “.... मेरे इस सवाल से थोड़ा  सकपका कर और आत्मीयता के स्वर में वो बोला ....”ऐसा कुछ नहीं सर, वो बस आपका हँसमुख चेहरा देख कर ख़ुशी और शांति सी मिलती है .....”.... ‘अच्छा’बोल कर मैं आगे निकल गया.... और सोचने लगा बाहरी तौर पर हम कितने भी संतुलित मालूम होते हों ....अंदर की बेचैनी का किसी को नहीं पता होता ....अंदर की बेचैनी कब कौनसा तूफ़ान ले आए , हम ख़ुद नामालूम से रहते हैं।....जीवन परीक्षाओं का पुलिंदा होता है तो हमारा अंतर्मन जज़्बाती बारूद का ज़ख़ीरा। इस अंतर्मन में विचारों की कौनसी चिंगारी कब किसी जज़्बाती बारूद के कण से मिल कर क्या क्या करवा दे ,किसे पता ।..... ये अंतस की बेचैनी जीवन को यथास्वरूप जीने नहीं देती ....ये बेचैनी ही है जो रातों को सोने नहीं देती .....ये जीवन की पक्की सड़कें छोड़ गुमनाम पगडंडियों पर चलवाती है। जहाँ काँटे ही काँटे मिलते हैं।....

वर्ल्ड कप 2019- Tryst With Destiny

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‌ 14 जुलाई 2019 ....वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबला....क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में आज बड़ा दिन था, क्यूँकि आज इतिहास जो लिखा जाना था....इतिहास की इस किताब के दोनों खुले कोरे पन्नों पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड नाम की इबारतें लिखी थी ....हाशिये के दोनों तरफ रोमांच था और कोरे सफ़हों पर शहंशाही की होड़.....सिक्का उछला और गिरा विलियमसन की झोली में , (जिसे पता था कि इंग्लैंड का इतिहास चाहे 79 और 92 का फाइनल हो या 87 का सेमीफाइनल, पीछा करने में हारने का ही रहा है), खैर विलियमसन ने पिटाई करना चुना .....और 241 रन बोर्ड पर टांग दिए या यूँ कहूँ इंग्लिश गेंदबाज़ों ने 241 पर ही रोक दिया।.....उधर इंग्लैंड की पारी शुरू हुई। न्यूजीलैंड के सीमरों ने बॉल को हवा में तैराना शुरू किया......ट्रेंट बोल्ट, मैट हैनरी, फर्गुसन, नीशम, ग्रन्डहोम सब टूट पड़े।.....आननफानन में 86 रन पर 4 विकेट गंवा इंग्लैंड भी अब पानी माँगती नज़र आई। ......अब क्रीज़ पर थे दुनिया के बेहतरीन तूफानी खब्बू आल राउंडर- बेन स्टोक्स और अड़ियल जुझारू विकेटकीपर - जोस बटलर। ....लेकिन परिस्थिति क्रीज़ पर टिक ...

क्रिकेट ज्ञान .....भारत बनाम न्यूजीलैंड वर्ल्डकप सेमीफ़ाइनल

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आज के मैच से क्रिकेट की कई चिरपरिचित बातें सिद्ध हुई- 1. खेल के मैदान में प्रतिद्वंदी को कभी भी कम मत आँको। 2.हम कितने भी तुर्रम खां बन जायें, जब तक होमवर्क नहीं करेंगे , खेल के मैदान में कुछ नहीं हैं। 3. अतिविश्वास अंत का परिचायक होता है , विनाश का द्वार खोलता है। 4. धोनी से बड़े दिल का खिलाड़ी इस जन्म में इस पीढ़ी को फिर देखने को नहीं मिलेगा। 15 साल तक लगातार किसी टीम के लिए खेलने वाला एकमात्र विकेटकीपर ऐसे ही नहीं है वो। 5. सलामी जोड़ी जब तक रन नहीं बनाएगी ना तो टार्गेट सेट होगा ना अचीव। अगर हुआ भी तो बस भाग्य भरोसे। 6. माना कि क्रिकेट चान्स का खेल भी है और भाग्य का भी लेकिन ज़्यादातर मौक़ों पर जो टीम बेहतर खेलेगी वो ही जीतेगी। 7. वर्ल्ड कप चार साल में एक बार आता है ,माना कि प्रेशर भी ख़ूब होता है , लेकिन ग़लतियों से सीख कर आगे बढ़ना बहुत ज़रूरी होता है। #सेमीफ़ाइनल INDvsNZ #वर्ल्डकप2019

बाँझ हवाओं में घुला दर्द ......

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हाँ मज़लूम सी   ज़िन्दगी मेरी रोज़ तकती है   फलक की पेशानी बारिशों को तकते जैसे धरती रो दी हो , या कहीं दूर बादलों का कश पीते पहाड़ मदहोश हुआ हो। अबकी बार कोई मौसम दस्तक दे तो समझ जाना , बाँझ हवाओं में घुला   मेरा दर्द होगा ..... मैं नहीं। ©® प्रीत

‘गर्व’ के स्कूल का पहला दिन- 08 जुलाई 2019

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आज बहुत बड़ा दिन है .... हमारे परिवार में एक बड़ा अवसर   .... लेकिन साथ ही सुबह से मेरा मन भी ख़राब रहा ..... आज मेरे भांजे , मेरी जान , मेरी आँख के तारे गर्व प्रताप सिंह का पहला दिन था स्कूल में .... वो इतना छोटू , इतना कोमल और इतना प्यारा दुलारा है हम सबका .... और ख़ास करके मेरी तो साँस , धड़कन और रग रग में इतना जज़्ब है कि उसके स्कूल जाने के ख़्याल ने ही कल रात से मुझे बेचैन सा कर दिया .... पिछले महीने जब उसके जन्मदिन के अवसर पर छुट्टी गया था तो मुझसे बोला था ‘’ मामा ! मैं स्कूल नहीं जाना , मेनू सब कुछ आंदा है ’’ और फटाफट कापी पेन लेकर कुछ लिखने लग गया .... उस नन्ही सी 3 साल की जान की पेन की पकड़ और कापी पर लिखे हुए पैटर्न को देख कर ही मैं हैरान हुआ जा रहा था .... लगा जैसे किसी पिछले जन्म का विद्वान रहा हो ...... या फिर कोई दिव्य पवित्र रूह .... मन में कई सवाल थे कि 3 साल का नन्हा बच्चा इतना सिमेट्रि...